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  1. REV.S1 प्रस्तावना
  2. REV.S2 संबोधन, नमस्कार तथा स्तुति
  3. REV.S3 ईश्वरीय दर्शन का प्रारंभ
  4. REV.S4 इफ़ेसॉस की कलीसिया को
  5. REV.S5 स्मुरना की कलीसिया को
  6. REV.S6 पेरगामॉस की कलीसिया को
  7. REV.S7 थुआतेइरा की कलीसिया को
  8. REV.S8 सारदेइस की कलीसिया को
  9. REV.S9 फ़िलादेलफ़ेइया की कलीसिया को
  10. REV.S10 लाओदीकेइया की कलीसिया को
  11. REV.S11 स्वर्गीय सिंहासन
  12. REV.S12 पुस्तक तथा मेमना
  13. REV.S13 पहली मोहर
  14. REV.S14 1,44,000 पर मोहर
  15. REV.S15 सफ़ेद वस्त्रों में विशाल भीड़
  16. REV.S16 सातवीं मोहर
  17. REV.S17 पहिली चार तुरहियां
  18. REV.S18 पांचवीं तुरही
  19. REV.S19 निकट आता अंतिम दंड
  20. REV.S20 दो गवाह
  21. REV.S21 सातवीं तुरही
  22. REV.S22 स्त्री तथा परों वाला सांप
  23. REV.S23 परों वाले सांप और हिंसक पशु
  24. REV.S24 झूठा भविष्यद्वक्ता—हिंसक पशु का दास
  25. REV.S25 मेमना तथा 1,44,000
  26. REV.S26 तीन स्वर्गदूत
  27. REV.S27 पृथ्वी पर उपज तथा दाख इकट्ठा करना
  28. REV.S28 सात विपत्तियां लिए हुए सात स्वर्गदूत
  29. REV.S29 परमेश्वर के क्रोध के सात कटोरे
  30. REV.S30 कुख्यात व्यभिचारिणी तथा हिंसक पशु
  31. REV.S31 स्वर्गदूत द्वारा बाबेल के पतन की घोषणा
  32. REV.S32 परमेश्वर की प्रजा का अलग किया जाना
  33. REV.S33 पृथ्वी पर बाबेल के लिए विलाप
  34. REV.S34 महानगर बाबेल की अंतिम स्थिति
  35. REV.S35 स्वर्ग में विजय का यशगान
  36. REV.S36 घुड़सवार सफ़ेद घोड़े पर
  37. REV.S37 हज़ार वर्ष का राज्य
  38. REV.S38 शैतान के लिए तय किया गया दंड
  39. REV.S39 मरे हुओं का न्याय
  40. REV.S40 स्वर्गीय येरूशलेम
  41. REV.S41 मसीहिक येरूशलेम
  42. REV.S42 जीवन की नदी
  43. REV.S43 मसीह येशु का निकट आता आगमन
  44. REV.S44 उपसंहार: निमंत्रण और चेतावनी