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- DEU.S1 मूसा इसराईलियों से मुख़ातिब होता है
- DEU.S2 राहनुमा मुक़र्रर किए गए
- DEU.S3 मुल्के-कनान में जासूस
- DEU.S4 रेगिस्तान में दुबारा सफ़र
- DEU.S5 सीहोन बादशाह से जंग
- DEU.S6 बसन के बादशाह ओज की शिकस्त
- DEU.S7 यरदन के मशरिक़ में मुल्क की तक़सीम
- DEU.S8 मूसा को यरदन पार करने की इजाज़त नहीं मिलती
- DEU.S9 फ़रमाँबरदारी की अशद्द ज़रूरत
- DEU.S10 बुतपरस्ती के बारे में आगाही
- DEU.S11 रब ही हमारा ख़ुदा है
- DEU.S12 यरदन के मशरिक़ में पनाह के शहर
- DEU.S13 शरीअत का पेशलफ़्ज़
- DEU.S14 दस अहकाम
- DEU.S15 लोग रब से डरते हैं
- DEU.S16 सबसे बड़ा हुक्म
- DEU.S17 दूसरी कनानी क़ौमों को निकालना है
- DEU.S18 रब को न भूलना
- DEU.S19 मुल्क मिलने का सबब इसराईल की रास्ती नहीं है
- DEU.S20 सोने का बछड़ा
- DEU.S21 मूसा को नई तख़्तियाँ मिलती हैं
- DEU.S22 इमामों और लावियों की ख़िदमत
- DEU.S23 रब का ख़ौफ़
- DEU.S24 रब से मुहब्बत रख और उस की सुन
- DEU.S25 मुल्क में रब के अहकाम
- DEU.S26 मुल्क में एक ही जगह पर मक़दिस हो
- DEU.S27 देवताओं की तरफ़ ले जानेवालों से सुलूक
- DEU.S28 पाक और नापाक जानवर
- DEU.S29 अपनी पैदावार का दसवाँ हिस्सा मख़सूस करना
- DEU.S30 क़र्ज़दारों की बहाली का साल
- DEU.S31 ग़ुलामों को आज़ाद करने का फ़र्ज़
- DEU.S32 जानवरों के पहलौठे मख़सूस हैं
- DEU.S33 फ़सह की ईद
- DEU.S34 फ़सल की कटाई की ईद
- DEU.S35 झोंपड़ियों की ईद
- DEU.S36 क़ाज़ी मुक़र्रर करना
- DEU.S37 बुतपरस्ती की सज़ा
- DEU.S38 मक़दिस में आलातरीन अदालत
- DEU.S39 बादशाह के बारे में उसूल
- DEU.S40 इमामों और लावियों का हिस्सा
- DEU.S41 जादूगरी मना है
- DEU.S42 नबी का वादा
- DEU.S43 पनाह के शहर
- DEU.S44 ज़मीनों की हद्दें
- DEU.S45 अदालत में गवाह
- DEU.S46 जंग के उसूल
- DEU.S47 नामालूम क़त्ल का कफ़्फ़ारा
- DEU.S48 जंगी क़ैदी औरत से शादी
- DEU.S49 पहलौठे के हुक़ूक़
- DEU.S50 सरकश बेटा
- DEU.S51 सज़ाए-मौत पानेवाले को उसी दिन दफ़नाना है
- DEU.S52 मदद करने के लिए तैयार रहना
- DEU.S53 क़ुदरती इंतज़ाम के तहत रहना
- DEU.S54 इज़दिवाजी ज़िंदगी की हिफ़ाज़त
- DEU.S55 मुक़द्दस इजतिमा में शरीक होने की शरायत
- DEU.S56 ख़ैमागाह में नापाकी
- DEU.S57 फ़रार हुए ग़ुलामों की मदद करना
- DEU.S58 मंदिर में इसमतफ़रोशी मना है
- DEU.S59 अपने हमवतनों से सूद न लेना
- DEU.S60 अपनी मन्नत पूरी करना
- DEU.S61 दूसरे के बाग़ में से गुज़रने का रवैया
- DEU.S62 तलाक़ और दुबारा शादी
- DEU.S63 मज़ीद हिदायात
- DEU.S64 ग़रीबों के हुक़ूक़
- DEU.S65 कोड़े लगाने की मुनासिब सज़ा
- DEU.S66 बैल का मुँह न बाँधना
- DEU.S67 मरहूम भाई की बीवी से शादी करने का हुक्म
- DEU.S68 झगड़े में नाज़ेबा हरकतें
- DEU.S69 धोका न देना
- DEU.S70 अमालीक़ियों को सज़ा देना
- DEU.S71 ज़मीन की पहली पैदावार रब को पेश करना
- DEU.S72 फ़सल का ज़रूरतमंदों के लिए हिस्सा
- DEU.S73 तुम रब की क़ौम हो
- DEU.S74 ऐबाल पहाड़ पर क़ुरबानगाह बनाना है
- DEU.S75 ऐबाल पहाड़ पर से लानत
- DEU.S76 फ़रमाँबरदारी की बरकतें
- DEU.S77 नाफ़रमानी की लानतें
- DEU.S78 मोआब में रब के साथ नया अहद
- DEU.S79 बुतपरस्ती की सज़ा
- DEU.S80 तौबा के मुसबत नतीजे
- DEU.S81 ज़िंदगी या मौत का चुनाव
- DEU.S82 यशुअ को मूसा की जगह मुक़र्रर किया जाता है
- DEU.S83 हर सात साल के बाद शरीअत की तिलावत
- DEU.S84 रब मूसा को आख़िरी हिदायात देता है
- DEU.S85 मूसा का गीत
- DEU.S86 मूसा का नबू पहाड़ पर इंतक़ाल
- DEU.S87 मूसा क़बीलों को बरकत देता है
- DEU.S88 मूसा की वफ़ात


