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  1. JOB.S1 अय्यूब की दीनदारी
  2. JOB.S2 अय्यूब के किरदार पर इलज़ाम
  3. JOB.S3 अय्यूब पर बीमारी का हमला
  4. JOB.S4 अय्यूब के तीन दोस्त
  5. JOB.S5 अय्यूब की आहो-ज़ारी
  6. JOB.S6 इलीफ़ज़ का एतराज़ : इनसान अल्लाह के हुज़ूर रास्त नहीं ठहर सकता
  7. JOB.S7 अल्लाह की तादीब तसलीम कर
  8. JOB.S8 अय्यूब का जवाब : साबित करो कि मुझसे क्या ग़लती हुई है
  9. JOB.S9 अल्लाह मुझे क्यों नहीं छोड़ता?
  10. JOB.S10 बिलदद का जवाब : अपने गुनाह से तौबा कर!
  11. JOB.S11 अय्यूब का जवाब : सालिस के बग़ैर मैं रास्तबाज़ नहीं ठहर सकता
  12. JOB.S12 मुझे अपनी जान से घिन आती है
  13. JOB.S13 ज़ूफ़र का जवाब : तौबा कर
  14. JOB.S14 अय्यूब का जवाब : मैं मज़ाक़ का निशाना बन गया हूँ
  15. JOB.S15 अय्यूब की मायूसी में दुआ
  16. JOB.S16 इलीफ़ज़ का जवाब : अय्यूब कुफ़र बक रहा है
  17. JOB.S17 अय्यूब का जवाब : मैं बेगुनाह हूँ
  18. JOB.S18 अल्लाह से इल्तिजा
  19. JOB.S19 बिलदद : अल्लाह बेदीनों को सज़ा देता है
  20. JOB.S20 अय्यूब : मैं जानता हूँ कि मेरा नजातदहिंदा ज़िंदा है
  21. JOB.S21 ज़ूफ़र : ग़लत काम की मुंसिफ़ाना सज़ा दी जाएगी
  22. JOB.S22 अय्यूब : बहुत दफ़ा बेदीनों को सज़ा नहीं मिलती
  23. JOB.S23 इलीफ़ज़ : अय्यूब शरीर है
  24. JOB.S24 अय्यूब : काश मैं अल्लाह को कहीं पाता
  25. JOB.S25 ज़मीन पर कितनी नाइनसाफ़ी पाई जाती है
  26. JOB.S26 बिलदद : अल्लाह के सामने कोई रास्तबाज़ नहीं ठहर सकता
  27. JOB.S27 अय्यूब : तूने मुझे कितने अच्छे मशवरे दिए हैं!
  28. JOB.S28 कौन अल्लाह की अज़मत का अंदाज़ा लगा सकता है?
  29. JOB.S29 मैं बेक़ुसूर हूँ
  30. JOB.S30 बेदीन ज़िंदा नहीं रहेगा
  31. JOB.S31 हिकमत कहाँ पाई जाती है?
  32. JOB.S32 काश मेरी ज़िंदगी पहले की तरह हो
  33. JOB.S33 मुझे रद्द किया गया है
  34. JOB.S34 मेरी आख़िरी बात : मैं बेगुनाह हूँ
  35. JOB.S35 चौथे साथी इलीहू की तक़रीर
  36. JOB.S36 अल्लाह कई तरीक़ों से इनसान से हमकलाम होता है
  37. JOB.S37 अल्लाह हर एक को मुनासिब अज्र देता है
  38. JOB.S38 अपने आपको रास्तबाज़ मत ठहराना
  39. JOB.S39 अल्लाह कितना अज़ीम है
  40. JOB.S40 अल्लाह का जवाब
  41. JOB.S41 अय्यूब रब को जवाब नहीं दे सकता
  42. JOB.S42 अल्लाह का जवाब : क्या तुझे मेरी जैसी क़ुदरत हासिल है?
  43. JOB.S43 अल्लाह की क़ुदरत और हिकमत की दो मिसालें
  44. JOB.S44 अय्यूब की आख़िरी बात
  45. JOB.S45 अय्यूब अपने दोस्तों की शफ़ाअत करता है