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- JOS.S1 रब यशुअ को राहनुमाई की ज़िम्मादारी सौंपता है
- JOS.S2 मुल्क में दाख़िल होने की तैयारियाँ
- JOS.S3 यरीहू शहर में इसराईली जासूस
- JOS.S4 इसराईली दरियाए-यरदन को उबूर करते हैं
- JOS.S5 यादगार पत्थर
- JOS.S6 जिलजाल में ख़तना
- JOS.S7 फ़रिश्ते से यशुअ की मुलाक़ात
- JOS.S8 यरीहू की तबाही
- JOS.S9 अकन का गुनाह
- JOS.S10 अई की शिकस्त
- JOS.S11 ऐबाल पहाड़ पर अहद की तजदीद
- JOS.S12 जिबऊनी यशुअ को धोका देते हैं
- JOS.S13 अमोरियों की शिकस्त
- JOS.S14 पाँच अमोरी बादशाहों की गिरिफ़्तारी
- JOS.S15 मज़ीद अमोरी शहरों पर क़ब्ज़ा
- JOS.S16 शिमाली इत्तहादियों पर फ़तह
- JOS.S17 शिमाली कनान पर क़ब्ज़ा
- JOS.S18 मूसा की फ़ुतूहात का ख़ुलासा
- JOS.S19 यशुअ की फ़ुतूहात का ख़ुलासा
- JOS.S20 कनान के बाक़ी इलाक़ों पर क़ब्ज़ा करने का हुक्म
- JOS.S21 यरदन के मशरिक़ में मुल्क की तक़सीम
- JOS.S22 रूबिन का क़बायली इलाक़ा
- JOS.S23 जद के क़बीले का इलाक़ा
- JOS.S24 मनस्सी के मशरिक़ी हिस्से का इलाक़ा
- JOS.S25 कनान की तक़सीम
- JOS.S26 कालिब हबरून पाने की गुज़ारिश करता है
- JOS.S27 यहूदाह की सरहद्दें
- JOS.S28 हबरून और दबीर पर फ़तह
- JOS.S29 यहूदाह के क़बीले के शहर
- JOS.S30 इफ़राईम और मनस्सी की जुनूबी सरहद
- JOS.S31 इफ़राईम का इलाक़ा
- JOS.S32 मनस्सी का इलाक़ा
- JOS.S33 इफ़राईम और मनस्सी मज़ीद ज़मीन का तक़ाज़ा करते हैं
- JOS.S34 बाक़ी सात क़बीलों को ज़मीन मिलती है
- JOS.S35 बिनयमीन का इलाक़ा
- JOS.S36 शमौन का इलाक़ा
- JOS.S37 ज़बूलून का इलाक़ा
- JOS.S38 इशकार का इलाक़ा
- JOS.S39 आशर का इलाक़ा
- JOS.S40 नफ़ताली का इलाक़ा
- JOS.S41 दान का इलाक़ा
- JOS.S42 यशुअ को भी ज़मीन मिलती है
- JOS.S43 पनाह के छः शहर
- JOS.S44 लावियों के शहर और चरागाहें
- JOS.S45 क़िहात के घराने के शहर
- JOS.S46 जैरसोन के घराने के शहर
- JOS.S47 मिरारी के घराने के शहर
- JOS.S48 अल्लाह ने अपना वादा पूरा किया
- JOS.S49 मशरिक़ी क़बीलों को घर वापस जाने की इजाज़त
- JOS.S50 मशरिक़ी क़बीले क़ुरबानगाह बना लेते हैं
- JOS.S51 यशुअ की आख़िरी नसीहतें
- JOS.S52 अल्लाह और इसराईल के दरमियान अहद की तजदीद
- JOS.S53 यशुअ और इलियज़र का इंतक़ाल


