मसीही साथियाँ खात्तर मदद की प्रेरणा

1मन्‍नै इब उन पवित्र माणसां नै जो यरुशलेम म्ह रहवै सै, उन ताहीं दान देण की सेवकाई कै बारै म्ह लिखण की जरूरत कोनी। 2क्यूँके मदद करण की थारी मन की लालसा नै मै पैहले तै ए जांणु सूं, जिसकै कारण मै थारे बारै म्ह मकिदुनिया कलीसिया के बिश्वासी भाईयाँ कै स्याम्ही गर्व करुँ सूं, के थम अखाया परदेस के माणस एक साल पैहल्या तै दान देण खात्तर त्यार थे, अर थारे जोश नै घणखरे मकिदुनिया परदेस के बिश्वासियाँ ताहीं भी दान देण खात्तर उत्साहित करया सै। 3पर मै थारे धोरै तीतुस अर दो बिश्वासी भाईयाँ नै भेज्जू सूं, के हमनै जो गर्व थारे बारै म्ह दिखाया, वो इस बात म्ह बेकार ना ठहरै; पर जिसा मन्‍नै कह्या उसाए थम यरुशलेम के बिश्वासी भाईयाँ नै दान देण खात्तर त्यार रहो। 4इसा ना हो के जिब मकिदुनिया के कुछ बिश्वासी भाई मेरै गेल्या आवै अर वो थमनै दान देण खात्तर त्यार न्ही पावै, तो हो सकै सै, के हम थारे पै भरोस्से करण के कारण शर्मिन्दा होवां, पर थम म्हारे तै भी ज्यादा शर्मिन्दा होओगे। 5ज्यांतै मन्‍नै बिश्वासी भाईयाँ तै या बिनती करणा जरूरी समझया के वे पैहल्या तै थारे धोरै जावै, अर जो दान देण का वादा थमनै करया था, उसका इन्तजाम कर ल्यो, जो थमनै कंजूसी तै न्ही पर खुल्‍ले दिल तै देण खात्तर कह्या।