पौलुस का दिव्य दर्शन अर कमजोर
1ऊतो घमण्ड करणा मेरै खात्तर ठीक कोनी तोभी करणा पड़ै सै; ज्यांतै मै प्रभु के दिए होए दर्शनां अर प्रकाशनां का जिक्र करुँगा। 2मै मसीह म्ह एक माणस नै जांणु सूं; जिसनै चौदहा साल हो लिए, मै न्ही जाणदा के वो माणस देह म्ह था, या फेर आत्मा म्ह था, सिर्फ परमेसवर ए जाणै सै, इसा माणस सबतै ऊँच्चे सुर्ग म्ह ठा लिया गया। 3मै उस्से बात नै दोहराऊ सूं, मै न्ही जाणदा, के इसा होया था या फेर यो एक दर्शन था, परमेसवर ए जाणै सै। 4के वो सुर्गलोक पै ठा लिया गया, अर ओड़ै उसनै इसी अदभुत बात सुणी, जिनका जिक्र करणा किसे भी माणस के बस का कोनी, वे बात दुसरे माणसां ताहीं बताणा मना सै। 5इसे माणस पै तो मै घमण्ड करुँगा, पर अपणे पै अपणी कमजोरियाँ नै छोड़, अपणे बारै म्ह घमण्ड न्ही करुँगा। 6क्यूँके जै मै घमण्ड करणा चाहूँ भी तो बेकूफ न्ही बणुगाँ, क्यूँके सच बोल्लूँगा; मै अपणी बड़ाई न्ही करणा चाहन्दा, इसा ना होवै के जिसा कोए मन्नै देक्खै सै या मन्नै सुणै सै, मन्नै उसतै बाध समझै।


