अन्त का आणा

1फेर यहोवा का यो वचन मेरे धोरै पोहच्या 2“हे माणस की सन्तान, प्रभु यहोवा इस्राएल की धरती कै बारै म्ह न्यू कहवै सै, के अन्त होया; च्यांरु कुण्यां समेत इस्राएल का अन्त आ ग्या सै। 3तेरा अन्त भी आ ग्या, अर मै अपणा छो तेरै पै भड़काकै तेरे चाल चलण कै मुताबिक तेरे ताहीं सजा देऊँगा; अर तेरे सारे घिनोणे काम्मां का फळ तेरे ताहीं देऊँगा। 4मेरी दया की नजर तेरे पै ना होवैगी, अर ना मै कोमलता करुँगा; अर जिब ताहीं तेरे घिनोणे पाप तेरे म्ह बणे रहवैंगे तब ताहीं मै तेरे चाल-चलण का फळ तेरे ताहीं दियुँगा। फेर तू जाण लेवैगा के मै यहोवा सूं।”

5“प्रभु यहोवा न्यू कहवै सै: विपत्ति सै, एक बड़ी विपत्ति सै! देक्खो, वो आवै सै। 6अन्त आ ग्या सै, सब का अन्त आया सै; वो तेरै खिलाफ जाग्या सै। देक्खो, वो आवै सै। 7हे देश के बासिन्दे, तेरे खात्तर चक्र घूम चुक्या, बखत आ ग्या, दिन धोरै सै; पहाड़ी मंदरा म्ह कोए खुशी के जशन का दिन न्ही, सोर सराबा ए का होवैगा। 8इब भोत जल्दी मै अपणी जळजळाहट तेरे पै भड़काऊँगा, अर तेरे पै पूरा छो उण्डेलूँगा अर तेरे चाल चलण कै मुताबिक तेरे ताहीं सजा देऊँगा। अर तेरे सारे घिनोणे काम्मां का फळ तेरे ताहीं भुगताऊँगा। 9मेरी दया की नजर तेरे पै ना होवैगी अर ना मै तेरे पै कोमलता करुँगा। मै तेरी चाल चलण का फळ तेरे ताहीं भुगताऊँगा, अर तेरे घिनोणे पाप तेरे म्ह बणे रहवैंगे। फेर थम जाण ल्योगे के मै यहोवा सजा देण आळा सूं।”

10“देक्खो, उस दिन नै देक्खो, वो आवै सै! चक्र घूम चुक्या, छड़ी फूल चुकी, घमण्ड फुल्या सै। 11हुड़दंग बढ़दे-बढ़दे बुराई की सजा बणग्या; उन म्ह तै कोए ना बचैगा, अर ना उनकी भीड़भाड़, ना उनके धन म्ह तै कुछ रहवैगा; अर ना उन म्ह तै किसे कै खात्तर विलाप सुणाई पड़ैगा। 12बखत आ ग्या, दिन धोरै आ ग्या सै; ना तो मोल लेण आळा आनन्द करै अर ना बेचण आळा शोक करै, क्यूँके इस्राएल देश म्ह रहण लागरे सब माणसां पै छो भड़क उठ्या सै। 13चाहे वे जिन्दा रहवैं, तोभी बेचण आळा बेची होई चीज कै धोरै कदे बोहड़ण ना पावैगा; क्यूँके दर्शन की या बात देश की सारी भीड़ पै घटैगी; कोए ना लौटेगा; कोए भी माणस, जो अधर्म म्ह जिन्दा रहवै सै, बल ना पकड़ सकैगा।”

14“उननै नरसिंगा फूँक्या अर सारा कुछ त्यार कर दिया; पर युद्ध म्ह कोए न्ही जान्दा क्यूँके इस्राएल देश की सारी भीड़ पै मेरा छो भड़क्या होया सै।”