इस्राएल का सुन्‍नापण

15“बाहर तलवार अर भित्तर काळ अर मरी सैं; जो बाहर मैदान म्ह हो वो तलवार तै मरैगा, अर जो घरां म्ह हो वो भूख अर मरी तै मारया जावैगा। 16अर उन म्ह तै जो बच लिकड़ैंगे वे बचैंगें तो सही पर अपणे-अपणे अधर्म म्ह फँसे रहकै तराइयां म्ह रहण आळे कबूतरां की तरियां पहाड़ां के उप्पर विलाप करदे रहवैंगे। 17सारया के हाथ ढील्‍ले अर सारया के घुटने घणे कमजोर हो जावैंगे। 18उसनै कह्या वे अपणा दुख जाहिर करण खात्तर कमर पै टाट कसैंगे, अर उनके रोएँ खड़े होवैंगे; सारया के मुँह सूख जावैंगे अर सारया के सिर मुँण्ड़े जावैंगे। 19वे अपणी चाँदी सड़कां म्ह फेंक देवैंगे, अर उनका सोन्‍ना अशुद्ध चीज ठहरैगा; यहोवा की जळण कै दिन उनका सोन्‍ना-चाँदी उननै बचा ना सकैगा, ना उसतै उनका जी संतुष्ट होवैगा, ना उनके पेट भरैगें। क्यूँके वो उनके पाप म्ह फसण का कारण होया सै। 20उनका देश जो शोभायमान अर शिरोमणि था, उसके विषय म्ह उननै गर्व ए गर्व करकै उस म्ह अपणी घृणित चिज्जां की मूरतां, अर घृणित चीज बणा राक्खी, इस कारण मन्‍नै उस ताहीं उनके खात्तर अशुद्ध चीज ठहराई सै। 21मै उसनै लूटण कै खात्तर परदेशियाँ के हाथ, अर धन छीनण कै खात्तर धरती के दुष्ट माणसां के बस म्ह कर दियुँगा; अर वे उसनै अपवित्र कर देवैंगे। 22मै उनतै मुँह फेर ल्यूँगा, फेर वे मेरी सुरक्षित जगहां नै अपवित्र करैंगे; डाकू उस म्ह घुसकै उसनै अपवित्र करैंगे।”

23“एक साँकळ बणा दे, क्यूँके देश अन्याय की हत्या तै, अर नगर हुड़दंग तै भरया होया सै। 24मै गैरजात्तां के बुरे तै बुरे माणसां नै ल्याऊँगा, जो उनके घरां के माल्‍लिक हो जावैंगे; अर मै ताकतवरां का गर्व तोड़ दियुँगा अर उनके पवित्रस्‍थान अपवित्र करे जावैंगे। 25सत्यानाश होण पै सै फेर ढूँढ़ण पै भी उननै शान्ति न्ही मिलैगी। 26विपत्ति पै विपत्ति आवैगी अर उड़दी होई चर्चा पै जिक्र सुणाई पड़ैगा; अर इस्राएली माणस नबी तै दर्शन की बात पूच्छैगें, पर याजक कै धोरै तै नियम-कायदे, अर पुरनिये कै धोरै तै सलाह देण की शक्ति जान्दी रहवैगी। 27राजा तो शोक करैगा, अर रईस उदासी रूपी कपड़े पहैरेंगे, अर देश के माणसां के हाथ ढील्‍ले पड़ैंगे। मै उनके चलण कै मुताबिक उनतै बरताव करुँगा, अर उनकी कमाई कै मुताबिक उननै सजा देऊँगा; फेर इस्राएली जाण लेवैंगे के मै यहोवा सूं।”