परमेसवर की महिमा का मन्दर तै लिकड़ जाणा

1इसके बाद मन्‍नै देख्या के करूबां के सिरां कै उप्पर जो अकासमण्डल सै, उस म्ह नीलमणि का सिंहासन जिसा कुछ दिखाई देवै सै। 2फेर यहोवा नै उस सण के कपड़े पैहरे होए माणस तै कह्या, “घूम्मण आळे पहियाँ कै बीच करूबां कै नीच्‍चै जा अर अपणी दोन्‍नु मुट्ठियाँ नै करूबां कै बीच के अंगारयाँ तै भरकै यरुशलेम नगर पै बिखेर दे।” अंत म्ह वो मेरे देखदे-देखदे पहियाँ के बीच म्ह गया।

3जिब वो माणस भित्तर गया, जिब वे करूब भवन के दक्षिण की ओड़ खड़े थे; अर बादळ भित्तर आळे आँगण म्ह भरया होया था। 4फेर यहोवा का तेज करूबां कै उप्पर तै उठकै भवन की देहळीया पै आ ग्या; अर बादळ भवन म्ह भरग्या; अर वो आँगण यहोवा के तेज की रोशनी तै भरग्या। 5करूबां के पंखां का शब्द मंदर के बाहरी आँगण ताहीं सुणाई देवै था, वो सर्वशक्तिमान परमेसवर के बोलण का जिसा शब्द था।

6जिब उसनै सण के कपड़े पैहरे होए माणस ताहीं घूम्मण आळे पहियाँ के भित्तर करूबां कै बीच म्ह तै आग लेण का हुकम दिया, फेर वो उनके बीच म्ह जाकै एक पहिये कै धोरै खड़या होया। 7फेर करूबां कै बीच म्ह तै एक करूब नै अपणा हाथ बढ़ाकै, उस आग म्ह तै जो करूबां कै बीच म्ह थी, कुछ ठाकै सण के कपड़े पैहरे होए माणस की मुट्ठी म्ह दे दी; अर वो उसनै लेकै बाहर चल्या गया। 8करूबां के पंखां कै नीच्‍चै तो माणस का हाथ जिसा कुछ दिखाई देवै था।

9फेर मन्‍नै देख्या, के करूबां कै धोरै च्यार पहिये सैं; यानिके एक-एक करूब कै धोरै एक-एक पहिया सै, अर पहियाँ का रूप फीरोजा का जिसा सै। 10उनका इसा रूप सै, के च्यांरु एक जिसे दिखाई देवै सैं, जिस तरियां एक पहिये कै बिचाळै दूसरा पहिया हो। 11चाल्‍लण कै बखत वे अपणी च्यांरु दिशा के बळ तै चाल्‍लै सैं; अर चाल्दे बखत मुड़दे न्ही, बलके जित्त उनका सिर रहवै सै वे उधर ए उसके पाच्छै चाल्‍लै सैं अर चाल्दे बखत वे मुड़दे न्ही। 12अर पीठ हाथ अर पंखां समेत करूबां का सारा शरीर अर जो चार पहिये उनके सैं, वे भी सारे के सारे च्यांरु ओड़ आँख्यां तै भरे होए सैं। 13मेरे सुणदे होए इन पहियाँ ताहीं चक्‍कर कह्या गया, यानिके घूम्मण आळे पहिये। 14एक-एक के च्यार-च्यार मुँह थे; एक मुँह तो करूब का जिसा, दूसरा माणस का जिसा, तीसरा शेर का जिसा, अर चौथा उकाब पंछी का जिसा।

15करूब धरती पै तै उठगे। ये वेए जीवधारी सैं, जो मन्‍नै कबार नदी कै धोरै देक्खे थे। 16जिब-जिब वे करूब चाल्‍लै थे तब-तब वे पहिये उनके धोरै-धोरै चाल्‍लै थे; अर जिब-जिब करूब धरती पै तै उठण कै खात्तर अपणे पंख ठान्दे तब-तब पहिये उनके धोरै तै न्ही मुड़ै थे। 17जिब करूब खड़े होन्दे फेर ये भी खड़े होवैं थे; अर जिब वे पहिये उठै फेर ये भी उनकै गैल उठै थे; क्यूँके जीवधारियां की आत्मा इन म्ह भी रहवै थी।

18यहोवा का तेज भवन की देहळीया पै तै उठकै करूबां कै उप्पर ठहर ग्या। 19फेर करूब अपणे पंख ठाकै मेरे देखदे-देखदे धरती पै तै उठकै लिकड़गे; अर पहिये भी उनकै गैल-गैल गये, अर वे सारे यहोवा के भवन के पूर्वी फाटक म्ह खड़े होगे; अर इस्राएल के परमेसवर का तेज उनके उप्पर ठहरया रहया।

20ये वेए जीवधारी सैं जो मन्‍नै कबार नदी कै धोरै इस्राएल के परमेसवर कै नीच्‍चै देक्खे थे; अर मन्‍नै जाण लिया के वे भी करूब सैं। 21हर एक के च्यार मुँह अर च्यार पंख अर पंखां कै तळै माणस के जिसे हाथ भी थे। 22उनके मुखां का रूप वोए सै जो मन्‍नै कबार नदी के किनारे पै देख्या था। अर उनके मुँह ए के बलके उनकी सारी देह भी उसीए थी। वे सीध्धे अपणे-अपणे स्याम्ही ए चाल्‍लै थे।