यरुशलेम का जीवन एक वेश्या की तरियां
23“तेरी उस सारी बुराई कै बाद के होया? प्रभु यहोवा की या वाणी सै, हाय, तेरे पै हाय! 24तन्नै एक गुम्मट बणवा लिया, अर हर एक चौक म्ह एक ऊँच्ची जगहां बणवा ली; 25अर एक-एक सड़क के सिरे पै भी तन्नै अपणी ऊँच्ची जगहां बणवाकै अपणी सुन्दरता घृणित करा दी, अर हर एक मुसाफिर नै कुकर्म कै खात्तर बुलाकै महाव्यभिचारिणी होगी। 26तन्नै अपणे पड़ोसी मिस्री माणसां तै भी, जो मोट्टे-ताजे सैं, व्यभिचार करया अर मेरे ताहीं छो दिलाण खात्तर अपणा व्यभिचार बढ़ान्दी गई। 27इस कारण मन्नै अपणा हाथ तेरै खिलाफ बढ़ाकै, तेरा हर दिन का खाणा घटा दिया, अर तेरी बैरण पलिश्ती जनान्नी जो तेरे महापाप की चाल तै शरमावै सै, उनकी इच्छा पै मन्नै तेरे ताहीं छोड़ दिया सै। 28फेर भी तेरी प्यास ना बुझी, इस करकै तन्नै अश्शूरी माणसां तै भी व्यभिचार करया; अर उनतै व्यभिचार करण पै भी तेरी प्यास ना बुझी। 29फेर तू लेण-देण के देश म्ह व्यभिचार करदे-करदे कसदियाँ के देश ताहीं पोहची, अर ओड़ै भी तेरी प्यास ना बुझी।”
30“प्रभु यहोवा की या वाणी सै के तेरा दिल किसा चंचल सै के तू ये सारे काम करै सै, जो बेशर्म वेश्या ए के काम सैं? 31तन्नै हर एक सड़क के सिरे पै जो अपणा गुम्मट, अर हर चौंक म्ह अपणी ऊँच्ची जगहां बणवाई सै, के इसे म्ह तू वेश्या की तरियां न्ही ठहरी? क्यूँके तू इसी कमाई पै हाँस्सै सै। 32तू व्यभिचारिणी घरआळी सै। तू पराए माणसां नै अपणे घरआळे के बदले ग्रहण करै सै। 33सारी वेश्या नै तो रुपया मिलै सै, पर तन्नै अपणे सारे दोस्तां ताहीं खुद रपिये देकै, अर उन ताहीं लालच दिखाकै बुलाया सै के वे च्यांरु ओड़ तै आकै तेरे तै व्यभिचार करैं। 34इस तरियां तेरा व्यभिचार दुसरे व्यभिचारियाँ तै उलटा सै। तेरे पाच्छै कोए व्यभिचारी न्ही चालदा, अर तू किसे तै दाम न्ही लेन्दी, बलके तू ए देवै सै; इस कारण तू उलटी ठहरी।”


