अम्मोनियाँ की बेजती का बदला

28“फेर हे माणस की सन्तान, भविष्यवाणी करकै कह के प्रभु यहोवा अम्मोनियाँ अर उनकी करी होई बदनाम्मी कै बारै म्ह न्यू कहवै सै; तू कह, खींची होई तलवार सै, वो तलवार घात कै खात्तर झलकाई होई सै के नाश करै अर बिजळी की तरियां हो 29जिब ताहीं के वे तेरे बारे म्ह झूठ्ठे दर्शन पावै, अर झूठ्ठे भावी तेरे ताहीं बतावै सैं के तू उन दुष्ट लाईलाज घायलां की गर्दनां पै पड़ै जिनका दिन आ ग्या, अर जिनके अधर्म के अन्त का बखत आण पोहच्या सै। 30उस ताहीं म्यान म्ह फेर धर। जिस जगहां म्ह तू सिरजी गई अर जिस देश म्ह तेरी उत्पत्ति होई, उसे म्ह मै तेरा न्याय करुँगा। 31मै तेरे पै अपणा छो भड़काऊँगा अर तेरे पै अपणी जळजळाहट की आग फूँक दियुँगा; अर तेरे ताहीं पशु सरीखे माणस के हाथ कर देऊँगा जो नाश करण म्ह माहिर सैं। 32तू आग का निवाळा होवैगी; तेरा खून देश म्ह बण्या रहवैगा; तू याद म्ह ना रहवैगी क्यूँके मन्‍नै यहोवा ए नै इसा कह्या सै।”