बड़ी भाण, सामरिया
5“ओहोला जिब मेरी थी, जिब तै ए व्यभिचारिणी होकै अपणे दोस्तां पै मोहित होण लाग्गी जो उसके पड़ोसी अश्शूरी थे। 6वे तो सारे के सारे नीले कपड़े पैहरण आळे मनभावणे जवान, अधिपति अर प्रधान थे, अर घोड़यां पै सवार थे। 7इस करकै उसनै उन्हे कै गैल व्यभिचार करया जो सारे के सारे आच्छे अश्शूरी थे; अर जिस किसे पै वा मोहित होई, उसे की मूरतां तै वो अशुद्ध होई। 8जो व्यभिचार उसनै मिस्र म्ह सिख्या था, उस ताहीं भी उसनै ना छोड्या; क्यूँके बचपन म्ह माणसां नै उसकै गैल कुकर्म करया, अर उसकी छातियाँ मींजी, अर तन-मन तै उसके गैल व्यभिचार करया गया था। 9इस कारण मन्नै उस ताहीं उन्हे अश्शूरी दोस्तां के हाथ कर दिया जिनपै वा मोहित होई थी। 10उननै उस ताहीं नंगी करया; उसके बेट्टे-बेटियाँ ताहीं खोसकै उस ताहीं तलवार तै घात करया; इस तरियां उनके हाथ तै सजा पाकै वो जनानियाँ म्ह मशहुर होगी।”


