यहेजकेल बोलण कै लायक ना रहया

22फेर यहोवा की शक्ति ओड़ैए मेरे पै प्रगट होई, अर उसनै मेरे ताहीं कह्या, “उठकै मैदान म्ह जा; अर ओड़ै मै तेरे तै बात करुँगा।” 23फेर मै उठकै मैदान म्ह गया, अर ओड़ै के देख्या, के यहोवा का प्रताप जिसा मेरे ताहीं कबार नदी के किनारे पै देख्या, उसाए उरै भी दिखाई पड़ै सै; अर मै मुँह के बळ गिरकै दण्डवत करया। 24फेर परमेसवर का आत्मा मेरे म्ह समाकै मेरे ताहीं पैरां कै बळ खड़या कर दिया; फेर वो मेरे ताहीं कहण लाग्या, “जा अपणे घर के भित्तर किवाड़ बन्द करकै बैठ्या रह। 25हे माणस की सन्तान, देख; वे माणस तेरे ताहीं रस्सियाँ तै जकड़ कै बाँध लेंगे, अर तू लिकड़कै उनके बीच जाण न्ही पावैगा। 26मै तेरी जीभ तेरे ताळुवै तै चिपका दियुँगा; जिसतै तू चुप रहकै उनका डाँटण आळा ना हो, क्यूँके वे बिद्रोही घरान्‍ने के सैं। 27पर जिब-जिब मै तेरे तै बात करुँ, तब-तब तेरे मुँह नै खोल्‍लूँगा, अर तू उनतै इसा कहिये, ‘प्रभु यहोवा न्यू कहवै सै,’ जो सुणै सै वो सुण ले अर जो न्ही सुणदा वो ना सुणै, वे तो बिद्रोही घरान्‍ने के सैं ए।”