यीशु के अधिकार का प्रश्न

1एक दिन इसा होया के जिब यीशु मसीह मन्दर म्ह माणसां नै उपदेश देवै था अर सुसमाचार सुणावै था, तो प्रधान याजक अर शास्त्री, यहूदी अगुवां कै गेल्या धोरै आकै खड़े होए, 2अर कहण लाग्गे, “म्हारै ताहीं बता, तू इन काम्मां नै किसकै हक तै करै सै, अर वो कौण सै जिसनै तेरे ताहीं यो हक दिया सै?”

3उसनै उनतै कह्या, “मै भी थारे तै एक बात बुझ्झु सूं, मन्‍नै बताओ। 4यूहन्‍ना का बपतिस्मा सुर्ग की ओड़ था या माणसां की ओड़ तै था?”

5फेर वे आप्पस म्ह कहण लाग्गे, “जै हम कह्वां, ‘सुर्ग की ओड़,’ तो वो कहवैगा, ‘फेर थमनै उसका बिश्वास क्यांतै न्ही करया?’ 6अर जै हम कह्वां, ‘माणसां की ओड़,’ तो सारे माणस म्हारै पै पत्थर बरसावैगें, क्यूँके सारे जाणै सै के यूहन्‍ना साच्‍चीये नबी था।”

7आखर उननै जवाब दिया, “हमनै न्ही बेरा के वो किस ओड़ तै था।”

8यीशु नै उनतै कह्या, “तो मै भी कोनी बतान्दा के मै ये काम किस हक तै करुँ सूं।”