नियम-कायदे पै चाल्‍लण की इच्छा

पै

129तेरी चितौनियाँ अनोखी सै,

इस कारण मै उननै अपणे जी तै पकड़े होये सूं।

130तेरी बात्तां कै खुलण तै चान्दणा होवै सै;

उसतै भोळे लोग समझ पाया करै सै।

131मै मुँह खोल कै हांफण लाग्या,

क्यूँके मै तेरे हुकमां का प्यासा था।

132जिस तरियां तेरी रीत अपणे नाम के प्रेम राक्खण आळयां तै सै,

उस्से तरियां मेरी ओड़ भी मुड़कै मेरै पै दया कर।

133मेरे पैरां नै अपणे वचन के राह पै मजबूत कर,

अर किस्से गलत बात नै मेरै पै राज ना करण दे।

134मन्‍नै माणसां के अत्याचार तै छुड़ाले,

फेर मै तेरे वचनां नै मान्‍नुगा।

135अपणे दास पै अपणे मुँह का चान्दणा चमका दे,

अर अपणी विधियाँ मन्‍नै सिखा।

136मेरी आँखां तै आँसुआँ की धार बहन्दी रहवै सै,

क्यूँके लोग तेरे नियम-कायदे नै न्ही मान्दे।