नूह बलि चढाथै

20नूह परभु के निता अक्ठी बेदी बनाथै, नूह सुध्द पसु अउ सुध्द पक्छी मसे कुछ के चुनथै अउ बेदी हे उनखर बलि चढाथै। 21जब परभु के बलि के खुसबू मिलथै तब भगवान अपन हिरदय हे सोचथै, “मनसेन के कारन मै भुंइ के अब सराप नेहको देहुं, मनसे बचपन लग जउन कुछ उनखर मन हे पइदा होथै ऊ बुराई पइदा होथै, जसना मै सगलू जीवन के अब मारे हव। ओसना उनके फेरै नेहको मरहुं। 22जब तक दुनिया हबै, तब तक बोबाई कटाई के टेम आही, अउ हरमेसा सरदी, ठन्ड, घाम, बरसात, दिन, रात, कारतिक लगेतार होवत रही।”