बेतेल हे याकूब के सपना
10याकूब बेरसेबा के छांड के अउ ऊ हारान सहर छो कढ गइस। 11याकूब के यातरा करत टेम बेरा बुढ जथै, इहैनिता ऊ रात बितामै के निता अक जिघा ठहरै गइस, याकूब ऊ जिघा अक्ठी पथरा देखिस अउ सोमै के निता ओखर उप्पर अपन मूंड रखके सोइस। 12याकूब स्वरगदूत के ऊ सीढी हे चढत-उतरत देखिस अउ भगवान के ऊ सीढी के लिघ्घो ठाढ देखथै, 13भगवान ओखर लिघ्घो ठाढ हुइके कथै, मै तोर बाबा अब्राहम के भगवान यहों, अउ तोर बाफ इसहाक के भगवान यहों, जउन भुंइ हे तै सोय हबस, उके मै तोके अउ तोर लरकन के दइहों। 14तोर लरका ओतका हुइहिन जेकता भुंइ के माटी के नान-नान पथरा हबै, उन पूरब, पच्छिम, उत्तर दख्छिन हे फइल जइहिन, भुंइ के सगलू परवार तोर लरका के कारन मोर लग आसीस पइहिन। 15मै तोर संग हव, जिहां कहि तै जइहे, मै तोके बचाइहों, मै तोके हइ देस हे वापिस लइहों, जउन बात मै तोर लग कहे हव, जब तक उके पूर न कर लो तब तक तोके कबहुन नेहको छांडिहो। 16तब याकूब नींद लग जगिस, ता ऊ कथै, जरूर हइ जिघा भगवान आथै, मै हइ नेहको जानथो। 17याकूब डर गइस, ऊ कथै, “हइ बोहत बडा जिघा हबै, हइ तो भगवान के घर आय, हइ तो स्वरग कर दूरा हबै।” 18याकूब दूसर रोज सुबेन्ने उठिस, ऊ पथरा के उठाइस अउ ओही बगल हे ठाढ कर दइस, तब ऊ ओखर उप्पर तेल चढाइस, हइ मेर लग ऊ भगवान के सुरता के निता खम्भा बनाइस। 19ऊ सहर कर नाम लूज रथै, पय याकूब उके बेतेल धरिस। 20याकूब अक्ठी बचन दइस, ऊ कथै, “अगर भगवान मोर संग रही अउ भगवान जिहां कहि मै जइहों, ऊ मोके बचइ, अगर भगवान मोके खाय के निता अउ पहिनै के निता कपडा देही, 21अगर मै अपन बाफ के लिघ्घो सान्ति लग लउटो, अगर भगवान हइ सगलू चीज करही, ता भगवान मोर भगवान होही। 22हइ जिघा हे मै हइ पथरा के ठाढ करे हव, भगवान के पवितर जिघा होही अउ भगवान जउन कुछु तै मोके देही ओखर दसमांस मै तोके दइहों।”


