याकूब के एसाव लग मिलै के तइयारी

1याकूब ऊ जिघा छांडे रहै, जब ऊ यातरा करत रथै, ऊ भगवान के स्वरगदूत के देखिस। 2जब याकूब उके देखथै तब ऊ बोलथै, हइ तो भगवान कर दल हबै। इहैनिता याकूब ऊ जिघा के नाम महनैम धरिस। 3याकूब के भाई सेईर नाम परदेस हे रथै, हइ एदोम के डोंगर परदेस रथै, याकूब एसाव के लिघ्घो दूत पठोइस। 4याकूब स्वरगदूत लग कथै, “मोर मालिक एसाव के हइ संदेस दे, तुम्हर सेबक याकूब कथै, मै ई सगलू साल अबे तक लाबान के इछो परदेसी हुइके रहों। 5मोर लिघ्घो गाय गोरू छेडी, गदहा, गेडरा अउ नोकर नोकरानी हबै, मै अपन मालिक के बतामै के निता हइ संदेस पठोथो, जेहमा मै तोर किरपा नजर मोके मिलै।” 6स्वरगदूत याकूब के लिघ्घो लग लउटिस अउ कथै, “हम तुम्हर भाई एसाव के लिघ्घो गयन, ऊ तोर लग मिलै के निता अउत हबै, ओखर संग चार सव डउका हबै।” 7तब याकूब बोहत डर गइस, अउ परेसानी हे पड गय, अउ हइ सोचके अपन संगी के, अउ छेडी गेडरा, अउ गाय गोरू, उंटवा के अलगे-अलगे दुइ भाग हे कर दइस। 8याकूब सोचिस, अगर एसाव आयके अक्ठी भाग के नास करही, ता दूसर भाग के बच सकथै। 9याकूब कथै, “हे मोर बाफ अब्राहम के भगवान, हे मोर बाफ इसहाक के भगवान, तै मोके अपन देस हे लउटै के अउ अपन परवार हे आमै के निता कहे, तै कहे रथस कि तोर निक्खा करिहों। 10जउन करुना अउ सही तै अपन सेबक हे करे हबस ओखर निता मै हरमेसा अयोग्य हव, जब मै हइ यरदन नदिया पार करे रथो तब डेरा के नाम हे मोर लिघ्घो केबल अक्ठी डंडा रथै, पय अब मै एतका धनी हुइ गय हव कि मै दुइ भाग हे बांट के लउटत हव। 11किरपा करके मोके मोर भाई एसाव के हाथ लग मुकति कर, मै ओखर लग डरथो, असना झइ होय कि ऊ आयके हम सब के, लरका सहित दाय के मार डालै। 12हे भगवान, तै मोर लग कहे हबस, मै तुम्हर निक्खा करिहों, मै तुम्हर परवार के बढाहूं अउ तोर आय बाले लरका के समुन्दर के कुदरा के जसना बढाय देहुं, उन एकता हुइहिन कि गिने नेहको जाय सके।” 13याकूब रात के उहै जिघा रुकिस, याकूब कुछ चीज एसाव के भेंट दे के निता तइयार करिस। 14याकूब दुइ सव छेडी, बीस बोकडा, दुइ सव गेडरा, बीस नर गेडरा लइस। 15याकूब तीस उंटवा अउ उनखर लरका, चालीस गइया अउ दस गोरू, बीस गदही अउ दस गदहा लइस। 16याकूब पसु के हर अक्ठी झुंड नोकर के दइस, तब याकूब नोकर लग कथै, “सब पसु के हर झुंड के अलगे कर लेया, सब पसु के हर झुंड के बीच कुछ दूर रखा।” 17याकूब उनके आदेस दइस, पसु के पहिले झुंड बाले नोकर लग याकूब कथै, “मोर भाई एसाव जब तुम्हर लिघ्घो आही अउ तुम्हर लग पुछै, हइ पसु तोर सेबक याकूब के हबै? तै कछो जथस? तै केखर नोकर हबस? 18तै जबाब देबे, हइ पसु तोर सेबक याकूब के हबै, याकूब इनके अपन मालिक एसाव के भेंट के रूप हे पठोय हबै, अउ याकूब हमर पाछू आउत हबै।” 19याकूब दूसर नोकर, तीसर नोकर, अउ सगलू दूसर नोकरन के जउन झुंड के पाछू रथै, उनही इहै बात करै का आदेस दइस, ऊ कथै, “जब तुम एसाव लग मिलिहा ता इहै बात कइहा। 20तुम कइहा, हइ भेंट तुम्हर हबै, अउ तोर सेबक याकूबो मनसे के पाछू आउत हबै।” याकूब सोचिस, “अगर मै भेंट के संग हइ मनसे के आगू पठोहुं ता हइ हुइ सकथै कि एसाव मोके अपन गुस्सा के सान्त करके माफ कर दे अउ मोके स्बीकार कर ले।” 21इहैनिता याकूब एसाव के भेंट पठोइस, पय याकूब ऊ रात अपन तम्बू हे रुकिस।