रोकबे अउ आदेस देबे

18“मै तुम्हर लग सही कथो, कि जउन कुछ तुम हइ भुंइ हे बंधिहा, ऊ स्वरग हे बंधरही, जउन कुछ तुम हइ भुंइ हे छोरिहा, ऊ स्वरग हे छोररही।”

19मै फेरै तुम्हर लग सही कथो, कि अगर कउनो के बारे हे तुम मसे दुइ झन भुंइ हे अक्ठी मन होय के मंगिहा, ता स्वरग हे रहै बाले मोर बाफ के दवारा ऊ मिल जही। 20काखे जिहां कहुं मोर नाम लग दुइ या तीन झन अकजुट होथै, उछो उनखर बीच हे मै खुद होतो।