अंजीर रूख कर किस्सा
(मत्ती 24:32-35; लूका 21:29-33)
28अंजीर कर रूख लग ई किस्सा के सिखा, जब ओखर डगइल कोवड होथै, ता पत्ता निकडे लागथै, ता तुम जान जथा, कि जेठ के मोसम लिघ्घो हबै। 29इहैमेर जब तुम, ई बातन के होत देखिहा, ता जान लइहा कि टेम लिघ्घो हबै, बलुक फेरका के दूरा हे हबै। 30मै तुम्हर लग कथो, जब तक ई बात पूर नेहको होही, तब तक हइ पुरखा के मनसे नेहको मरहिन। 31बादर अउ भुंइ बढय जही, पय मोर बात कबहुन नेहको बढाही।


