ज़मीन की पहली पैदावार रब को पेश करना

1जब तू उस मुल्क में दाख़िल होगा जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में दे रहा है और तू उस पर क़ब्ज़ा करके उसमें आबाद हो जाएगा 2तो जो भी फ़सल तू काटेगा उसके पहले फल में से कुछ टोकरे में रखकर उस जगह ले जा जो रब तेरा ख़ुदा अपने नाम की सुकूनत के लिए चुनेगा। 3वहाँ ख़िदमत करनेवाले इमाम से कह, “आज मैं रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर एलान करता हूँ कि उस मुल्क में पहुँच गया हूँ जिसका हमें देने का वादा रब ने क़सम खाकर हमारे बापदादा से किया था।”

4तब इमाम तेरा टोकरा लेकर उसे रब तेरे ख़ुदा की क़ुरबानगाह के सामने रख दे। 5फिर रब अपने ख़ुदा के हुज़ूर कह, “मेरा बाप आवारा फिरनेवाला अरामी था जो अपने लोगों को लेकर मिसर में आबाद हुआ। वहाँ पहुँचते वक़्त उनकी तादाद कम थी, लेकिन होते होते वह बड़ी और ताक़तवर क़ौम बन गए। 6लेकिन मिसरियों ने हमारे साथ बुरा सुलूक किया और हमें दबाकर सख़्त ग़ुलामी में फँसा दिया। 7फिर हमने चिल्लाकर रब अपने बापदादा के ख़ुदा से फ़रियाद की, और रब ने हमारी सुनी। उसने हमारा दुख, हमारी मुसीबत और दबी हुई हालत देखी 8और बड़े इख़्तियार और क़ुदरत का इज़हार करके हमें मिसर से निकाल लाया। उस वक़्त उसने मिसरियों में दहशत फैलाकर बड़े मोजिज़े दिखाए। 9वह हमें यहाँ ले आया और यह मुल्क दिया जिसमें दूध और शहद की कसरत है। 10ऐ रब, अब मैं तुझे उस ज़मीन का पहला फल पेश करता हूँ जो तूने हमें बख़्शी है।”

अपनी पैदावार का टोकरा रब अपने ख़ुदा के सामने रखकर उसे सिजदा करना। 11ख़ुशी मनाना कि रब मेरे ख़ुदा ने मुझे और मेरे घराने को इतनी अच्छी चीज़ों से नवाज़ा है। इस ख़ुशी में अपने दरमियान रहनेवाले लावियों और परदेसियों को भी शामिल करना।