रब के घर की तामीरे-नौ

8जिलावतनी से वापस आने के दूसरे साल के दूसरे महीने में रब के घर की नए सिरे से तामीर शुरू हुई। इस काम में ज़रुब्बाबल बिन सियालतियेल, यशुअ बिन यूसदक़, दीगर इमाम और लावी और वतन में वापस आए हुए बाक़ी तमाम इसराईली शरीक हुए। तामीरी काम की निगरानी उन लावियों के ज़िम्मे लगा दी गई जिनकी उम्र 20 साल या इससे ज़ायद थी।

9ज़ैल के लोग मिलकर रब का घर बनानेवालों की निगरानी करते थे : यशुअ अपने बेटों और भाइयों समेत, क़दमियेल और उसके बेटे जो हूदावियाह की औलाद थे और हनदाद के ख़ानदान के लावी।

10रब के घर की बुनियाद रखते वक़्त इमाम अपने मुक़द्दस लिबास पहने हुए साथ खड़े हो गए और तुरम बजाने लगे। आसफ़ के ख़ानदान के लावी साथ साथ झाँझ बजाने और रब की सताइश करने लगे। सब कुछ इसराईल के बादशाह दाऊद की हिदायात के मुताबिक़ हुआ। 11वह हम्दो-सना के गीत से रब की तारीफ़ करने लगे, “वह भला है, और इसराईल पर उस की शफ़क़त अबदी है!” जब हाज़िरीन ने देखा कि रब के घर की बुनियाद रखी जा रही है तो सब रब की ख़ुशी में ज़ोरदार नारे लगाने लगे।

12लेकिन बहुत-से इमाम, लावी और ख़ानदानी सरपरस्त हाज़िर थे जिन्होंने रब का पहला घर देखा हुआ था। जब उनके देखते देखते रब के नए घर की बुनियाद रखी गई तो वह बुलंद आवाज़ से रोने लगे जबकि बाक़ी बहुत सारे लोग ख़ुशी के नारे लगा रहे थे। 13इतना शोर था कि ख़ुशी के नारों और रोने की आवाज़ों में इम्तियाज़ न किया जा सका। शोर दूर दूर तक सुनाई दिया।