एक ही ख़ुशख़बरी

6मैं हैरान हूँ! आप इतनी जल्दी से उसे तर्क कर रहे हैं जिसने मसीह के फ़ज़ल से आपको बुलाया। और अब आप एक फ़रक़ क़िस्म की “ख़ुशख़बरी” के पीछे लग गए हैं। 7असल में यह अल्लाह की ख़ुशख़बरी है नहीं। बस कुछ लोग आपको उलझन में डालकर मसीह की ख़ुशख़बरी में तबदीली लाना चाहते हैं। 8हमने तो असली ख़ुशख़बरी सुनाई और जो इससे फ़रक़ पैग़ाम सुनाता है उस पर लानत, ख़ाह हम ख़ुद ऐसा करें ख़ाह आसमान से कोई फ़रिश्ता उतरकर यह ग़लत पैग़ाम सुनाए। 9हम यह पहले बयान कर चुके हैं और अब मैं दुबारा कहता हूँ कि अगर कोई आपको ऐसी “ख़ुशख़बरी” सुनाए जो उससे फ़रक़ है जिसे आपने क़बूल किया है तो उस पर लानत!

10क्या मैं इसमें यह कोशिश कर रहा हूँ कि लोग मुझे क़बूल करें? हरगिज़ नहीं! मैं चाहता हूँ कि अल्लाह मुझे क़बूल करे। क्या मेरी कोशिश यह है कि मैं लोगों को पसंद आऊँ? अगर मैं अब तक ऐसा करता तो मसीह का ख़ादिम न होता।