बेदीन ज़िंदा नहीं रहेगा

13बेदीन अल्लाह से क्या अज्र पाएगा, ज़ालिम को क़ादिरे-मुतलक़ से मीरास में क्या मिलेगा? 14गो उसके बच्चे मुतअद्दिद हों, लेकिन आख़िरकार वह तलवार की ज़द में आएँगे। उस की औलाद भूकी रहेगी। 15जो बच जाएँ उन्हें मोहलक बीमारी से क़ब्र में पहुँचाया जाएगा, और उनकी बेवाएँ मातम नहीं कर पाएँगी। 16बेशक वह ख़ाक की तरह चाँदी का ढेर लगाए और मिट्टी की तरह नफ़ीस कपड़ों का तोदा इकट्ठा करे, 17लेकिन जो कपड़े वह जमा करे उन्हें रास्तबाज़ पहन लेगा, और जो चाँदी वह इकट्ठी करे उसे बेक़ुसूर तक़सीम करेगा। 18जो घर बेदीन बना ले वह घोंसले की मानिंद है, उस आरिज़ी झोंपड़ी की मानिंद जो चौकीदार अपने लिए बना लेता है। 19वह अमीर हालत में सो जाता है, लेकिन आख़िरी दफ़ा। जब अपनी आँखें खोल लेता तो तमाम दौलत जाती रही है। 20उस पर हौलनाक वाक़ियात का सैलाब टूट पड़ता, उसे रात के वक़्त आँधी छीन लेती है। 21मशरिक़ी लू उसे उड़ा ले जाती, उसे उठाकर उसके मक़ाम से दूर फेंक देती है। 22बेरहमी से वह उस पर यों झपट्टा मारती रहती है कि उसे बार बार भागना पड़ता है। 23वह तालियाँ बजाकर अपनी हिक़ारत का इज़हार करती, अपनी जगह से आवाज़े कसती है।