अव्वल हुक्म
34जब फ़रीसियों ने सुना कि ईसा ने सदूक़ियों को लाजवाब कर दिया है तो वह जमा हुए। 35उनमें से एक ने जो शरीअत का आलिम था उसे फँसाने के लिए सवाल किया, 36“उस्ताद, शरीअत में सबसे बड़ा हुक्म कौन-सा है?”
37ईसा ने जवाब दिया, “‘रब अपने ख़ुदा से अपने पूरे दिल, अपनी पूरी जान और अपने पूरे ज़हन से प्यार करना।’ 38यह अव्वल और सबसे बड़ा हुक्म है। 39और दूसरा हुक्म इसके बराबर यह है, ‘अपने पड़ोसी से वैसी मुहब्बत रखना जैसी तू अपने आपसे रखता है।’ 40तमाम शरीअत और नबियों की तालीमात इन दो अहकाम पर मबनी हैं।”


