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33ऐ रब, मुझे अपने आईन की राह सिखा तो मैं उम्र-भर उन पर अमल करूँगा।

34मुझे समझ अता कर ताकि तेरी शरीअत के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारूँ और पूरे दिल से उसके ताबे रहूँ।

35अपने अहकाम की राह पर मेरी राहनुमाई कर, क्योंकि यही मैं पसंद करता हूँ।

36मेरे दिल को लालच में आने न दे बल्कि उसे अपने फ़रमानों की तरफ़ मायल कर।

37मेरी आँखों को बातिल चीज़ों से फेर ले, और मुझे अपनी राहों पर सँभालकर मेरी जान को ताज़ादम कर।

38जो वादा तूने अपने ख़ादिम से किया वह पूरा कर ताकि लोग तेरा ख़ौफ़ मानें।

39जिस रुसवाई से मुझे ख़ौफ़ है उसका ख़तरा दूर कर, क्योंकि तेरे अहकाम अच्छे हैं।

40मैं तेरी हिदायात का शदीद आरज़ूमंद हूँ, अपनी रास्ती से मेरी जान को ताज़ादम कर।