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73तेरे हाथों ने मुझे बनाकर मज़बूत बुनियाद पर रख दिया है। मुझे समझ अता फ़रमा ताकि तेरे अहकाम सीख लूँ।
74जो तेरा ख़ौफ़ मानते हैं वह मुझे देखकर ख़ुश हो जाएँ, क्योंकि मैं तेरे कलाम के इंतज़ार में रहता हूँ।
75ऐ रब, मैंने जान लिया है कि तेरे फ़ैसले रास्त हैं। यह भी तेरी वफ़ादारी का इज़हार है कि तूने मुझे पस्त किया है।
76तेरी शफ़क़त मुझे तसल्ली दे, जिस तरह तूने अपने ख़ादिम से वादा किया है।
77मुझ पर अपने रहम का इज़हार कर ताकि मेरी जान में जान आए, क्योंकि मैं तेरी शरीअत से लुत्फ़अंदोज़ होता हूँ।
78जो मग़रूर मुझे झूट से पस्त कर रहे हैं वह शरमिंदा हो जाएँ। लेकिन मैं तेरे फ़रमानों में महवे-ख़याल रहूँगा।
79काश जो तेरा ख़ौफ़ मानते और तेरे अहकाम जानते हैं वह मेरे पास वापस आएँ!
80मेरा दिल तेरे आईन की पैरवी करने में बेइलज़ाम रहे ताकि मेरी रुसवाई न हो जाए।


