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105तेरा कलाम मेरे पाँवों के लिए चराग़ है जो मेरी राह को रौशन करता है।
106मैंने क़सम खाई है कि तेरे रास्त फ़रमानों की पैरवी करूँगा, और मैं यह वादा पूरा भी करूँगा।
107मुझे बहुत पस्त किया गया है। ऐ रब, अपने कलाम के मुताबिक़ मेरी जान को ताज़ादम कर।
108ऐ रब, मेरे मुँह की रज़ाकाराना क़ुरबानियों को पसंद कर और मुझे अपने आईन सिखा!
109मेरी जान हमेशा ख़तरे में है, लेकिन मैं तेरी शरीअत नहीं भूलता।
110बेदीनों ने मेरे लिए फंदा तैयार कर रखा है, लेकिन मैं तेरे फ़रमानों से नहीं भटका।
111तेरे अहकाम मेरी अबदी मीरास बन गए हैं, क्योंकि उनसे मेरा दिल ख़ुशी से उछलता है।
112मैंने अपना दिल तेरे अहकाम पर अमल करने की तरफ़ मायल किया है, क्योंकि इसका अज्र अबदी है।


