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121मैंने रास्त और बा-इनसाफ़ काम किया है, चुनाँचे मुझे उनके हवाले न कर जो मुझ पर ज़ुल्म करते हैं।

122अपने ख़ादिम की ख़ुशहाली का ज़ामिन बनकर मग़रूरों को मुझ पर ज़ुल्म करने न दे।

123मेरी आँखें तेरी नजात और तेरे रास्त वादे की राह देखते देखते रह गई हैं।

124अपने ख़ादिम से तेरा सुलूक तेरी शफ़क़त के मुताबिक़ हो। मुझे अपने अहकाम सिखा।

125मैं तेरा ही ख़ादिम हूँ। मुझे फ़हम अता फ़रमा ताकि तेरे आईन की पूरी समझ आए।

126अब वक़्त आ गया है कि रब क़दम उठाए, क्योंकि लोगों ने तेरी शरीअत को तोड़ डाला है।

127इसलिए मैं तेरे अहकाम को सोने बल्कि ख़ालिस सोने से ज़्यादा प्यार करता हूँ।

128इसलिए मैं एहतियात से तेरे तमाम आईन के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारता हूँ। मैं हर फ़रेबदेह राह से नफ़रत करता हूँ।