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153मेरी मुसीबत का ख़याल करके मुझे बचा! क्योंकि मैं तेरी शरीअत नहीं भूलता।
154अदालत में मेरे हक़ में लड़कर मेरा एवज़ाना दे ताकि मेरी जान छूट जाए। अपने वादे के मुताबिक़ मेरी जान को ताज़ादम कर।
155नजात बेदीनों से बहुत दूर है, क्योंकि वह तेरे अहकाम के तालिब नहीं होते।
156ऐ रब, तू मुतअद्दिद तरीक़ों से अपने रहम का इज़हार करता है। अपने आईन के मुताबिक़ मेरी जान को ताज़ादम कर।
157मेरा ताक़्क़ुब करनेवालों और मेरे दुश्मनों की बड़ी तादाद है, लेकिन मैं तेरे अहकाम से दूर नहीं हुआ।
158बेवफ़ाओं को देखकर मुझे घिन आती है, क्योंकि वह तेरे कलाम के मुताबिक़ ज़िंदगी नहीं गुज़ारते।
159देख, मुझे तेरे अहकाम से प्यार है। ऐ रब, अपनी शफ़क़त के मुताबिक़ मेरी जान को ताज़ादम कर।
160तेरे कलाम का लुब्बे-लुबाब सच्चाई है, तेरे तमाम रास्त फ़रमान अबद तक क़ायम हैं।


