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161सरदार बिलावजह मेरा पीछा करते हैं, लेकिन मेरा दिल तेरे कलाम से ही डरता है।
162मैं तेरे कलाम की ख़ुशी उस की तरह मनाता हूँ जिसे कसरत का माले-ग़नीमत मिल गया हो।
163मैं झूट से नफ़रत करता बल्कि घिन खाता हूँ, लेकिन तेरी शरीअत मुझे प्यारी है।
164मैं दिन में सात बार तेरी सताइश करता हूँ, क्योंकि तेरे अहकाम रास्त हैं।
165जिन्हें शरीअत प्यारी है उन्हें बड़ा सुकून हासिल है, वह किसी भी चीज़ से ठोकर खाकर नहीं गिरेंगे।
166ऐ रब, मैं तेरी नजात के इंतज़ार में रहते हुए तेरे अहकाम की पैरवी करता हूँ।
167मेरी जान तेरे फ़रमानों से लिपटी रहती है, वह उसे निहायत प्यारे हैं।
168मैं तेरे आईन और हिदायात की पैरवी करता हूँ, क्योंकि मेरी तमाम राहें तेरे सामने हैं।


