दोह कुवाऱ्युन किस्सो
1तेवी हेरगान राज त्यु दोह कुवाऱ्युन गेत रेय, ज्यु दिवा लेन वोवड़ाह मिलनेन निकेलन्यु। 2त्युम रेन पाच फोग्यु एने पाच सोमेजदार एत्यु। 3त्यु फोग्यु त्युन दिवा ते लेद्यु, पुण आरही तेल नाह लेद्यु; 4पुण सोमेजदार त्युन दिवा हेऱ्यु सिसी माय तेल बी बोर लेद्यु। 5जेवी वोवड़ाह आवणेन वार लाग गियी, ते त्यु आख्यु जोपणे बाज गीयो, एने हुव गीयो।
6आदि राती ओहली पुकार पोड़नी, “वोवड़ो आवणे बाजरिनोह, ताह मिलणेन केरता चालो।” 7तेवी त्यु आख्यु कुवाऱ्यु उठेन त्युन दिवा हुदारने बाज गीयु। 8एने फोग्यु सोमेजदाऱ्युह केयु, “तुमरा तेला माय रेन थोड़ोक आमुह बी आपो, काहाकाय आमरा दिवा ओलाणे केरतेह।” 9पुण सोमेजदाऱ्यु जापाप आप्यो, “ज्य आमरी एने तुमरी केरता पुरो नाय एय; हाजो ते ज्यो हे काय तुमू वेचणारा फाय जाईन तुमरी केरता वेचातो लेन आवो। 10जेवी त्यु वेचातो तेल लेणेन जाणे बाजरियेल एत्युन वोवड़ो आव गीयो, एने ज्यु तियार एत्यु, त्यु ता हेऱ्यु वाराड़ान गेरा माय जात रेन्यु, एने बायणो बोंद एय गीयो।”
11पासाण रेन त्यु कुवाऱ्यु बी आवीन केत्युह, “एय मालीक, एय मालीक, आमरे केरता बी बायणो उगाड़ दे।” 12पुण वुवड़ो जापाप आप्यो, “मी तुमूह खेरीच केथु, मी तुमूह उलखेत नाह।”
13तानकेरता जाकता रिवो, काहाकाय तुमू नाहते ता दिह्याह जाणते, नाहते तुलबूखेन टेमाह।


