माहयतला झगड़ा

14काहकि हामु जानता छे कि व्यवस्था ते आत्मिक छे, पुन हाव शारीरिक छे आरू पापन हातन वेचलु होतु छे। 15आरू जु हाव करतु छे ओको नी जानतु; काहकि जो हाव चाहतु छे चो नी करता, आरू जेका मखे घीन आवती छे, चो करतु छे। 16यदि जो हाव नी चाहतु चोज करतु छे, ते हाव मान लेतु छे कि व्यवस्था वारू छे। 17ती ओसी दशा मा ओको न करनेवाला हाव नी, वरना पाप छे जु मार मा बठ रोयु छे। 18काहकि हाव जानतु छे, कि मखे मा मतलब मारा शरीर मा कोय वारली वस्तु वास नी करतली, मरजी ते मखे मा छे, पुन वारला काम मखे बन नी पड़े। 19काहकि जीन वारला कामन हाव मरजी करतु छे, चाँ ते नी करे, पुन जीन बुराईन मरजी नी करतु, चो कर्‍या करतु छे। 20पुन यदि हाव चो करतु छे जिनान मरजी नी करे, ते ओको न करनेवावा हाव नी रवो, पुन पाप जु मखे मा बठलु छे। 21ते हाव यो व्यवस्था देखो कि ज्योत्यार भलाई करनेन मरजी करतु छे, ते बुराई मार जु आवती छे। 22काहकि हाव माहयतली आत्मा से ते यहोवा–भगवानन व्यवस्था छे बैस खुश रवता छे। 23पुन मखे आपना अंगो मा दिसरा प्रकारन व्यवस्था देखाय पड़ती छे, जी मारी ओकलन व्यवस्था रईन लड़ती छे आरू मखे पापन व्यवस्थान बन्धन मा नाखती छे जी मार अंगो मा छे। 24हाव कोसु अभागु मानसु छे! मखे इन मृत्युन देह रईन कुन छुड़ावसे छे? 25आमरू पोरबु ईशु मसीहन द्वारा मखे छुटकारो जुड़से एरकरीन हाव तुमू यहोवा–भगवानन धन्यवाद करतु छे, पुन शरीर छव पापन व्यवस्थान सेवा करतु छे।