विश्वास अरु ज्ञान

2हे मरा भैइहोन, अरु भैइनहोन जब तु अलग प्रकार की परीक्षाहोन मे पलनु, ते ओखे अपना आप खे आनन्द कि बात समझस. 3यो जानी खे की तुम्हारो विश्वास खे समज्यो जाना से धीरज पइदा होस हइ. 4पर धीरज खे अपनो पुरो काम करण दे की तु पुरो अरु सिध्द हुइ जास, अरु तुम मे कोइ बात की घटी नी ऱ्हेस. 5पर अगर तुम मे से कोय खे दिमाक की कमी हइ ते परमेश्वर से माग, जो बिन दोस दियोस सब खे उधारता से देस हइ, अरु ओखे दि जाये. 6पर विश्वास से माग, अरु कुछ सन्देह नी कर, क्युकी सन्देह करण आलो समुदर की लाट का बराबर हइ जो हवा से बोहास अरु उंछलस हइ. 7असो इन्सान यो नी समझस की मेखे प्रभु से कुछ मीलस, 8उ इन्सान दोचित्त हइ अरु अपनी बात मे चलाक हइ.