माफ नी करणवाला सेवक की दृष्‍टान्‍त

21तब पतरस ने ओका पास अय खे, यीशु से बोल्यो, “हे प्रभु, अगर मरो भैइ पाप करतो ऱ्हीये, ते मी केत्तना बार ओखे माफ करु, सात बार तक?”

22यीशु ने ओकासे बोल्यो, मी तरा से नी बोलुस, की सात बार तक वरन सात बार खे सत्तर गुना तक. 23“येका लिये स्वर्ग को राज्य उ राजा का जसो हइ, जेने अपना सेवक होन से लीख्यो लेनो चायो.” 24जब उ लीख्यी लेन लग्यो, ते एक झनो ओका जसो लायो गयो जो करोड सिक्का को कर्जदार थो. 25जब की चुकान खे ओका पास कुछ नी थो, ते ओका स्वामी ने बोल्यो, की यो अरु येकी लुगेन अरु ओका बाल-बच्चा अरु जो कुछ येको हइ सब कुछ बेची जाह्ये अरु उ करजो चुकय दियो जाये. 26येका पर उ सेवक ने ओका पाय पर गिरी खे ओखे प्रणाम कऱ्यो, अरु बोल्यो, हे स्वामी तुम धीरज धर मी सब कुछ भरी दुयु. 27तब उ सेवक का स्वामी ने दया खय खे ओखे छोडी दियो, अरु ओको करजो माफ कऱ्यो.

28“पन जब उ सेवक बाहेर नीकल्यो, ते ओका सब, सेवक होन मे से ओखे मील्या, जो ओका सौ सिक्का को कर्जदार थो. ओने ओखे पकड्यो, ‘ओका गलो दबायो अरु बोल्यो, जो कुछ तरा पर कर्जो हइ भरी दे.’ 29येका पर ओका सात का सेवक होन ओका पाय पर गिरी खे, अरु ओकासे प्रार्थना करण लग्यो. कि धीरज धर मी सब भरी दुयु. 30ओने नी मान्यो, पन जय खे ओखे बन्दीगृह मे डाली दियो. कि जब तक कर्जा खे भरी नी दिये तब तक व्हा ऱ्हेये. 31ओका सात का सेवक यो जो हुयो थो देखी खे उदास हुया, अरु अपना स्वामी खे पुरो हाल बतय दियो. 32तब ओका स्वामी ने ओखे बुलय खे अरु ओकासे बोल्यो, ‘हे दुष्ट सेवक, तोने जो मरासे प्रार्थना करी, ते मेने उ तरा पुरो कर्जो माफ कऱ्यो. 33येका लिये जसो मेने तरा पर दया करी, असो ही का तोखे भी अपना सात का सेवक पर दया करणो नी चातो थो?’ 34अरु ओका स्वामी ने घुस्सा मे अय खे ओखे जाल मे भेजी दियो, कि जब तक उ सब कर्जो भरी नी दिये तब तक व्हा पर ऱ्हीहे.”

35यो प्रकार अगर तुम मे से हर एक, “अपना भैइ खे मन से माफ नी करस ते मरो बाप जो स्वर्गीय मे हइ, तोखे भी माफ नी कर्‍हे.”