इबरी सेवकमन

2“कहूं तुमन कोनो इबरी सेवक ला बिसाथव, त ओह छै साल तक तुम्हर सेवा करय, पर सातवां साल ओह बिगर कोनो दाम चुकाय सुतंतर होके चले जावय। 3कहूं ओह एके झन आय हवय, त ओह अकेला सुतंतर होके चले जावय; पर कहूं ओकर आय के समय ओकर घरवाली ओकर संग म रहय, त ओकर घरवाली घलो ओकर संग चले जावय। 4कहूं ओकर मालिक ह कोनो माईलोगन ला ओकर घरवाली के रूप म देथे अऊ ओह बेटा या बेटीमन ला जनमथे, त ओ माईलोगन अऊ लइकामन मालिक के हो जाहीं, अऊ सिरिप ओ मनखे ह एके झन सुतंतर होके जावय।

5“पर कहूं ओ सेवक ह ये कहय, ‘मेंह अपन मालिक, अपन घरवाली अऊ अपन लइकामन ले मया करथंव, अऊ सुतंतर होके जाय बर नइं चाहत हंव,’ 6तब जरूरी अय कि ओकर मालिक ह ओला नियायीमन करा लानय। मालिक ह ओला कपाट या चौखट करा ले जावय अऊ एक ठन सूजा ले ओकर कान ला छेदय। तब ओह जिनगी भर ओ मालिक के सेवक हो जाही।

7“कहूं कोनो मनखे ह अपन बेटी ला सेविका के रूप म बेच देथे, त ओ सेविका ह एक सेवक के सहीं सुतंतर होके झन जावय। 8कहूं ओकर मालिक ह ओकर ले खुस नइं ए, जऊन ह कि ओला अपन बर बिसाय रिहिस, त फेर जरूरी अय कि ओह ओ सेविका ला छोंड़ देवय। ओला अधिकार नइं ए कि ओह सेविका ला परदेसीमन करा बेच देवय, काबरकि ओह सेविका के संग बिसवास ला टोरे हवय। 9कहूं ओह ओ सेविका ला अपन बेटा बर चुनथे, त फेर जरूरी अय कि ओह ओ सेविका ला एक बेटी के अधिकार देवय। 10कहूं ओह आने माईलोगन ले बिहाव कर लेथे, तब येह जरूरी अय कि ओह ये सेविका के जेवन-पानी, कपड़ा अऊ ओकर बिहाव संबंधी अधिकार के खियाल रखय। 11कहूं ओह ओ सेविका के ये तीनों चीजमन के पूरती नइं करय, त फेर ओ सेविका ह बिगर कुछू दाम चुकाय सुतंतर होके जा सकत हे।