मोटो छुटकारो
1आनीन करते जरुड़ी से के आमु तीहयी सच्चाय नी वात पोर जे आमु ह़मळला से, अळी बी मन लगाड़ो, आसम नी हयवा जोवे के वीरखीन तीमनी गेथा सेटा जत रेय। 2जे खबर ह़रगदुत नी लारे आपणा आड़ा-बुड़ा ने जड़ी तीहयी खरली हती, जे कोय तीहया हुकम ने नी पाळे अने जे कोय हुकम ने तोड़ीन पाप कर्यो तीमने आखा ने डंड जड़्यो। 3कदीम आमु एतरा मोटा छुटकारा पोर धीयान नी दीया, ता आमु कीकम बचहु? मालीक आखा सी पेले आहया छुटकारा नी वात कर्यो, अने जे तीने ह़मळ्या तीहयु अमारी जुगु साबीत हयु के आहयु ह़ाचली से। 4अने ह़ातेत भगवान बी आह़फा नी मरजी नी लारे सेलाणी, अने जुदा-कामु, अने आखा भाती नी सक्ती ना कामु, अने चोखली आत्मा ना वाटाम ने वाटवा नी लारे आनी गवाय आपतो र्यो।


