बिन्यामीन को संग मिस्र देश जानो
1कनान देश म अकाल अऊर भी भयंकर होतो गयो। 2जब हि अनाज मिस्र सी ले आयो होतो, खतम होय गयो तब उन्को बाप याकूब न उन्को सी कह्यो, “मिस्र देश ख फिर जावो, अऊर हमरो लायी कुछ अऊर जेवन की चिज ले क लावो।”
3तब यहूदा न अपनो बाप याकूब सी कह्यो, “ऊ आदमी न हम ख चेतावनी दे क कह्यो, ‘यदि तुम्हरो भाऊ तुम्हरो संग नहीं आयेंन, त तुम मोरो जवर मत आवो।’ 4येकोलायी यदि तय हमरो भाऊ ख हमरो संग भेजय, तब हम जाय क तोरो लायी जेवन की चिज ख ले क आबो, 5पर यदि तय ओख नहीं भेजय, त हम नहीं जाबो, कहालीकि ऊ आदमी न हम सी कह्यो, ‘यदि तुम्हरो भाऊ तुम्हरो संग नहीं आयेंन, त तुम मोरो जवर मत आवो’।”
6तब याकूब न कह्यो, “तुम न ऊ आदमी ख यो कहाली बतायो कि हमरो एक अऊर भाऊ हय, कहाली मोरो सी बुरो बर्ताव करयो?”
7उन्न कह्यो, “जब ऊ आदमी न हमरी अऊर हमरो रिश्तेदारों की हालत को बारे म यो रीति सी पुच्छ्यो, ‘कि का तुम्हरो बाप अभी तक जीन्दो हय? का तुम्हरो कोयी अऊर भाऊ भी हय?’ तब हम न हि सवाल को अनुसार ओको सी बात करयो। तब हम का जानत होतो कि ऊ हम सी कहेंन, कि अपनो भाऊ ख इत ले आवो।”
8तब यहूदा न अपनो बाप याकूब सी कह्यो, “ऊ लड़का ख मोरो संग भेज दे कि हम चले जाये; येको सी हम अऊर तय, अऊर हमरो बाल बच्चा मरनो नहीं पायेंन, अऊर जीन्दो रहेंन। 9मय ओकी सुरक्षा की जवाब दारी लेऊ हय; मोरोच हाथ सी तय ओख वापस लेजो। यदि मय ओख तोरो जवर पहुंचाय क आगु खड़ो नहीं कर देऊ, तब त मय हमेशा लायी तोरो अपराधी ठहरूं। 10यदि हम लोग वहां इंतजार नहीं करतो, त अब तक दूसरी बार वापस आतो।”
11तब उन्को बाप याकूब न उन्को सी कह्यो, “यदि सचमुच असीच बात हय त यो करो, यो देश की अच्छी अच्छी चिज म सी कुछ कुछ अपनो बोरा म ऊ आदमी लायी भेंट ले जावो : जसो थोड़ो सो बलसान, शहेद, मसाला, गन्धरस, पिस्ता, अऊर बदाम। 12तब अपनो अपनो संग दोय गुना रुपया ले जावो; अऊर जो रुपया तुम्हरो बोरा को ऊपर रख क लौटाय दियो गयो होतो, ओख भी धर क जावो; शायद यो भूल सी भयो हो। 13अपनो भाऊ ख भी संग ले क ऊ आदमी को जवर फिर जावो, 14अऊर सर्वशक्तिमान परमेश्वर ऊ आदमी ख तुम पर दयालु करेंन, जेको सी ऊ तुम्हरो दूसरो भाऊ ख अऊर बिन्यामीन ख भी आन देन; अऊर यदि बिन सन्तान ख बिछड़नोच हय, त असोच होन दे।”
15तब उन भाऊवों न ऊ भेंट, अऊर दोय गुना रुपया, अऊर बिन्यामीन ख भी संग म धरयो, अऊर चलन लग्यो, अऊर मिस्र देश म पहुंच क यूसुफ को आगु खड़ो भयो। 16उन्को संग बिन्यामीन ख देख क यूसुफ न अपनो घर को अधिकारी सी कह्यो, “हि आदमियों ख घर म पहुंचाय देवो, अऊर जनावर मार क जेवन तैयार करो; कहालीकि हि लोग दोपहर ख मोरो संग जेवन करेंन।” 17तब ऊ अधिकारी आदमी यूसुफ को कहन को अनुसार उन आदमियों ख यूसुफ को घर म ले गयो।
18जब हि यूसुफ को घर ख पहुंचायो गयो तब हि आपस म डर क कहन लग्यो, “जो रुपया पहिली बार हमरो बोरा म वापस कर दियो गयो होतो, ओकोच वजह हम अन्दर पहुंचायो गयो हंय; जेको सी कि ऊ आदमी हम पर टूट पड़्यो, अऊर हम्ख वश म कर क् अपनो दास बनायो, अऊर हमरो गधा ख भी छीन ले।” 19तब हि यूसुफ को घर को अधिकारी को जवर जाय क घर को दरवाजा पर ओको सी कहन लग्यो, 20“हे हमरो स्वामी, जब हम पहिली बार अनाज मोल लेन ख आयो होतो, 21तब हम घर ख जातो समय सराय म पहुंच क अपनो बोरा ख खोल्यो, त देख्यो कि एक एक जन को पूरो पूरो रुपया ओको बोरा म ऊपर रख्यो हय; येकोलायी हम ऊ रुपया ख फिर अपनो संग लायो हंय, 22अऊर दूसरो रुपया भी खान की चिज लेन लायी लायो हंय; हम नहीं जानजे कि हमरो रुपया हमरो बोरा म कौन रख दियो होतो।”
23ओन कह्यो, “चिन्ता मत करो, मत डरो! तुम्हरो परमेश्वर, जो तुम्हरो बाप को भी परमेश्वर हय, ओनच तुम ख तुम्हरो बोरा म धन दियो होना, तुम्हरो रुपया त मोख मिल गयो होतो।” तब ओन शिमोन ख निकाल क ओको संग कर दियो।
24तब ऊ अधिकारी न उन भाऊवों ख यूसुफ को घर म लिजाय क पानी दियो, तब उन्न अपनो पाय ख धोयो; तब ओन उन्को गधा लायी चारा भी दियो। 25तब यो सुन क कि अज हम्ख इतच जेवन करनो पड़ेंन, तब उन्न यूसुफ को आन को समय तक मतलब दोपहर तक, ऊ भेंट ख तैयार कर क् रख्यो। 26जब यूसुफ घर आयो तब हि ऊ भेंट ख, जो ओको हाथ म होती, ओको आगु घर म लिजायो अऊर जमीन पर गिर क ओख दण्डवत करयो। 27यूसुफ न उन्ख सब ठीक ठाक त हय असो पुच्छ्यो अऊर कह्यो, “का तुम्हरो ऊ बूढ्ढा बाप, जेकी तुम न चर्चा करी होती, ऊ ठीक हय? का ऊ अभी तक जीन्दो हय?”
28उन्न कह्यो, “हव, तोरो दास अऊर हमरो बाप ठीक हय अऊर अब तक जीन्दो भी हय।” तब उन्न मुंड झुकाय क फिर दण्डवत करयो।
29तब यूसुफ न आंखी ऊपर उठाय क अऊर अपनो सगो भाऊ बिन्यामीन ख देख क पुच्छ्यो, “का तुम्हरो ऊ छोटो भाऊ, जेकी चर्चा तुम न मोरो सी करी होती योच आय?” तब ओन कह्यो, “हे मोरो बेटा, परमेश्वर तोरो पर अनुग्रह करे।” 30यूसुफ जल्दी सी उठ्यो; कहालीकि अपनो छोटो भाऊ को वजह ओको मन भर आयो होतो, ओन अकेलो म आसू बहान लायी जागा ढूंढ़ी अऊर ऊ अपनी कोठरी म आयो, अऊर वहां रोय पड़्यो। 31तब अपनो मुंह धोय क निकल्यो, अऊर अपनो ख चुपचाप कर क् कह्यो, “जेवन परोसो।” 32तब उन्न ओको लायी अलग अऊर भाऊवों लायी भी अलग, अऊर जो मिस्री ओको संग खात रह्य उन्को लायी भी अलग जेवन परोस्यो; येकोलायी कि मिस्री इब्रियों को संग जेवन नहीं कर सकय, नहीं त मिस्री लोग असो करनो बुरो समझत होतो। 33अऊर यूसुफ को भाऊ ओको आगु बड़ो बड़ो पहिले अऊर छोटो छोटो पीछू, उन्ख अपनी अपनी उमर को अनुसार, कर्म सी बैठायो गयो; यो देख क हि हैरान होय क एक दूसरो को तरफ देखन लग्यो। 34तब यूसुफ अपनो आगु सी जेवन की चिजे उठाय उठाय क उन्को जवर भेजन लग्यो, अऊर बिन्यामीन ख अपनो भाऊवों सी पाच गुना जादा जेवन की चिजे मिली। यो तरह उन्न यूसुफ को संग खुशी मनायो।


