सदा काल लक रहनवालो को दर्सन
9मी न देखतो देखतो अंत म का देखो, कि सिंहासन रखो गयो, अऊर कोई अति पुरानो विराजमान भयो; ओ को कपड़ा हिम को जसो उजलो, अऊर मुंडी को बाल सुध्द ऊन सरी को हतो; ओको सिंहासन आगी अऊर ओको पहिया हुन धधकतो हुयो आगी को से दिखई पड़ह है। 10ऊ पुरानो को जोने आगी को धारा निकल ख बह रही हती; फिर हजारो हजार इंसान ओकी सेवा टहल कर रया हता, अऊर लाखो लाख इंसान ओको हाजिर हतो; फिर न्यायी बैठ गया, अऊर किताब हुन खोली गयी। 11ऊ बखत ऊ सींग को बड़ो बोल सुन ख मी देखते रयो, अऊर देखतो देखतो अंत म देखा कि ऊ चोऊथो जानवर ख मार डाल्यो गयो, अऊर ओ को आगी से धधकतो हुओ आगी से भस्म कियो गयो। 12बाकी बचिया हुआ जानवर हुन को अधिकार ले लियो गयो, पर उन को प्रान कुछ बखत को लाने बचायो गयो। 13मी न रात म सपना म देखा, अऊर देख्यो, इंसान को पोरिया-जसो कोई आकास को बादल हुन समेत आ रयो हतो, अऊर वी, ऊ अति पुरानो को जोने पहुँचियो, अऊर ओ ख ऊ ओको नजिक लायो है। 14तब ओ ख असो हक, महिमा अऊर राज्य दियो गयो, कि अऊर राज्य-राज्य को इंसान अऊर अगल-अगल कुल को अऊर अगल-अगल भासा बोलनवाला हुन सब ओको अधीन हो; ओको हक सदा लक अटल, अऊर ओ को राज्य अविनासी ठैरा।


