दुख अर संकट

(मरकुस 13:3-13; लूका 21:7-19)

3जब यीसु जैतून का टेकड़ा पर बठो हतो, ते चेला हुन न सुनसान म ओखा नजीक आयो अर बोल्यो, “कि हम ख बता कि यी बात हुन कब होऐ? तोरो आवन का अर दुनिया को आखरी को चिन्ह का होगो?”

4यीसु न उन ख कहयो दियो, सतरक रहनू कुई तुम ख कोई नी बहकाऐ, 5काहेकि बेजा हुन से असो होए जो मोरो नाम से आ ख कहे, मी मसी आय अर बेजा हुन ख बहकाऐ नी। 6तुम झगड़ा हुन पर झगड़ा हुन की बारे म सुनेगो, ते घबरा मत जानू काहेकि इन को होनू जरूरी हैं, पर उ बखत अन्त नी होऐ। 7काहेकि जात पर जाति अर राज पर राज चढ़ाई करेगों, अर धरती-धरती पर अकाल पड़ेगो, अर भूकम्प होगो। 8यी सब बात हुन दुख हुन को सुरू से होऐ।

9अऊर ते वी दुख देन ख लाने तुम ख पकड़वाएगो, अर तुम ख मार डालेगो, अर मोरो नाम को कारन सब जाति हुन ख अदमी तुम से बुराई रखेगो। 10एकोलाने बेजा हुन ठोकर खाएँगो, अर एक दूसरा ख पकड़वाएगो, अर एक दूसरा से बुराई रखेगो। 11अर बेजा हुन झूटा भविस्यवक्ता उठ खड़ो होगो, अर बेजा हुन ख बहकाऐ। 12अर अधर्म को बड़नो से बेजा हुन को प्रेम ठण्डो पड़ जाएगो, 13पर जो अन्त तक धीरे धरे रहेगो, ओको ही को उध्दार होगो। 14अर राज को यी अच्छो समाचार सारो दुनिया म प्रचार करो जाहे, काहेकि सब जाति हुन पर गवाई होए, तब अन्त आ जाएगो।