बारा चेलो को सेवा-काम
(मरकुस 6:7-13; लूका 9:1-6; 10:4-12)
5यी बारा हुन ख यीसु न यू कहना देख ख भेजियो, “कि गैर यहूदी हुन ख, अर नी जानु, अर सामरी हुन ख कोई भी सहर हुन म भीतर नी करनो।” 6जब इस्राएल कि भी घरानो ही कि खोई भई भेड़ी हुन को नजीक जानु। 7अऊर चलते-चलते यू खबर कर, स्वर्ग को राज निकट म आय गयो हैं। 8बीमार हुन ख अच्छो करो, मुर्दा हुन ख जिन्दो कर ख कोढ़ी हुन ख सुध्द कर, दुस्टात्मा ख निकाल ख। तुम, फिरी म मिलो हैं फिरी म दे दे। 9अपनो थैला हुन म नी ते सोना, अऊर नी पैसा अऊर नी ताँबा रखनो; 10रस्ता को लाने नी झोला रख, नी दो कुरता, नी जूता अऊर नी लाठी ले, काहेकि मजदूर ख ओको खाना मिलनू चाहिए।
11जे कोई सहर अर गाँव म जाओ, ते मालूम कर कि वहा कोन लायक हैं। अर जब तक वहाँ से नी निकले, ओको ही यहाँ पर रहनो। 12घर म भीतर आते बखत ओ ख आसीस दे जो। 13अदि उ घर को अदमी लायक होए ते तुमारो ख सान्ति उन पर मिले पर अदि वी लायक नी हो ते तुमारो सान्ति तुमारो नजीक लउट आहे। 14जे कोई तुम ख आदर नी कर अऊर तुम्हारी बात हुन नी सुने, ते उ घर अर उ सहर से निकलते बखत अपनो पाय हुन कि धूल झाड़ दे। 15मी तुम से सच कहूँ हैं कि न्याय को दिन उ देस कि दसा से सदोम अऊर अमोरा को सहर हुन कि दसा जादा सहन लायक होए।


