सादीसुदा जिन्दगी को उदाहरन

1अरे भई हुन, का तुम नी जाना हैं कि म नेम का जानावालो से कहूँ हैं कि जब तक अदमी जिन्दो रयो हैं, तब तक ओ पर नेम कि दया रय्हे हैं? 2सादी तब तक अपनो बंधन नियम से बनी रवह हैं जब तक उ जीवित यदि मर जाय हैं ते उ अपनो पति को नेम से छुट गई। 3एकोलाने अगर घर वालो को जीतो जी उ कुई दूसरो अदमी ख हो जाए, ते छिनालापन बोले, पर अगर घर वालो मर जाहे, ते उ नेम से छुट गई यहाँ तक कि अगर कुई दूसरो अदमी कि हो जाहे तब भी छिनालापन नी रहे। 4वसो ही अरे मोरो भई हुन, तुम भी मसी को सरीर को दुवारा नेम हुन ख लाने मरे हुयो बन गयो, कि उ दूसरो को हो जा, जो मरे हुयो म से जिन्दो भयो: काहेकि हम परमेस्वर का लाने फल लाएँ हे। 5काहे कि जब हम सारीरिक हतो, ते पाप हुन कि लालचपन से जो नेम हुन ख व्दारा हतो, मरन का फल पैदा करन का लाने हमारो जिन्दगी म काम करत हता। 6पर जे ख बन्धन म हता ओखा लाने मर ख अब नेम हुन से असो छुट गयो, कि लेख कि पुरानी रीति पर सेवा नी, पर आत्मा कि नई रीति पर सेवा कर हैं।