अपनो भई की नास को करन मत बन
13एकोलाने हम एक दूसरो ख दोस लगान छुड़ा ख आपस म निस्चय कर ले कि कोई अपनो भई ख रस्ता म ठोकर ख कारन म नी पैदा कर अर बनो। 14मोखा मालूम हैं अर प्रभु यीसु म मोखा जरूर भयो हैं कि कोई चीज अपनो खुद से असुध्द नी, पर जे ओ ख असुध्द समझ हैं ओको लाने असुध्द हैं। 15पर तोरो भई तोरो जोवन का कारन नाराज होय हैं ते फिर तू प्रेम को तरीका से नी चले हैं ते जे को लाने मसी मरे, ओ ख तू अपनो जोवन को व्दारा खत्म नी कर। 16अब तुमारी सामने जे भलो हैं ओको बारा म बुराई नी करनु। पर न्याय अर सान्ति अर सुध्द आत्मा म आनन्द हैं। 17काहेकि परमेस्वर को राज खान-पीवन को नी आय, पर धर्म अर मेलमिलाप अर उ सान्ति अर खुसी हैं जे सुध्द आत्मा से होवा हैं। 18जे मसी कि सेवा कर हैं, उ परमेस्वर ख प्रसन्न कर हैं, अर लोग हुन को बीच विस्वास लायक हैं।
19अऊर हम असी बात हुन म लगया रह जे न सान्ति ख बढ़ावा मिल अर जिनको दुवारो हम एक दूसरा हुन ख सुधार कर सक हैं। 20अऊर जोवन को कारन परमेस्वर को काम हुन ख नी बिगाड़ो यू सच्चो हैं। सब कुछ अपनो म सुध्द पर जोवन को दुवारो दुसरो ख रस्ता म ठोकर को कारन बुरो हैं। 21अच्छो ते यू हैं कि तू नी मांस खाए अर नी अंगूर को रस पीए नी अर कुछ असो करे जेसे तोरो भई ठोकर खाऐ। 22तोरो जे विस्वास हैं, ओ ख परमेस्वर को सामने अपनो मन म रख हैं। धन्य हैं वी जे उ बात म, जेखा उ ठीक परखा हैं अपनो तुम म दोस नी ठहरायो हैं। 23पर जे सक कर ख खाता हैं उ सजा को योग्य ठहर चूको, काहेकि उ विस्वास से नी खाऐ; अर जे कुछ विस्वास से नी, उ पाप हैं।


