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मनसे आदेस के नेहको मानै

1भगवान जेतका वन पसु बनाय रथै, उन मसे सपुवा चतुर रथै, ऊ डउकी लग कथै, “का सही भगवान कहे हबै, कि तै हइ बगिया के कउनो रूख के फडुहा के झइ खाबे?” 2डउकी सपुवा लग कथै, “हइ बगिया कर रूख कर फडुहा हम खाय सकथन,” 3पय भगवान कहे हबै, “जउन रूख बगिया कर बीच हे हबै, उके झइ खाबे अउ न तै ओही छिबे, नही ता मर जइहे।” 4तब सपुवा डउकी लग कथै, “तै नेहको मरिहे। 5भगवान जानथै कि जब तै उके खाबे ता तोर आंखी खुल जही, अउ निक्खा बेकार के जान जइहे अउ भगवान के जसना हुइ जइहे।” 6पय जब डउकी देखिस कि रूख कर फडुहा सुन्दर हबै, अउ मनभाउ दिखथै, खाय के निता निक्खा हबै अउ फडुहा उके दिमाकदार बनाही, तब डउकी रूख लग फडुहा के टोरिस अउ उके खाइस, अउ अपन डउका के देथै, अउ उहो उके खाइस। 7तब उन दोनोझन के आंखी खुल गइस अउ उनही पता हुइस कि हम बिगर कपडा के हवन, इहैनिता उन अंजीर कर पत्ता के जोड-जोड के लंगोटिया बनाय लेथै। 8तब आदम अउ हब्बा सांझ के टेम हे भगवान के चलै के आरो सुनथै, ऊ बगिया के रुखवन के बीच हे लुक गइन। 9तब भगवान गोहराय के आदम लग पूंछथै, “तै कछो हबस?” 10आदम कथै, “मै तोर आरो सुनके डर गय रहों, काखे मै बिगर कपडा के रथो, इहैनिता लुक गय रहों।” 11भगवान पूंछथै, “कोन हर तोके कहिस कि तै लंगडा हवस? का तै ऊ रूख के फडुहा खाय हबस, जेही न खाय के निता मै तोके आदेस दय रथो?” 12आदम कथै, “जउन डउकी के तै मोर संग रहै के निता दय हबस, उहै ऊ रूख लग मोके फडुहा दइस अउ मै उके खायों।” 13तब भगवान डउकी लग कथै, “हइ तै काहिन करे हबस?” डउकी कथै, “सपुवा मोके बहकाइस अउ मै फडुहा के खाय लयों।”

भगवान कर सजा

14तब भगवान सपुवा लग कथै, “तै जउन हइ करे हबस, इहैनिता तै सगलू रखै बाले पसु अउ सगलू बन बाले जानवर लग बोहत सरापित हबस, तै लादा के बल हे रेंगै करिहे, अउ जीवन भर माटी चाटत रइहे। 15मै तोके अउ डउकी के अक दूसर के दुस्मन बनइहों, तुम्हर लरका अउ एखर लरका आपस हे दुस्मन हुइहिन, तै एखर एडी के चबहे अउ ऊ तोर मूंड के कुचर देही।” 16फेर डउकी लग कथै, मै तोर पीरा अउ तोर लादा हे होमै लग एतका पीरा बढाहूं, कि तै पीरा हे हुइके लरका पइदा करिहे, अउ तोर आसरा तोर डउका के तरफ होही, अउ ऊ तोर उप्पर राज करही। 17अउ आदम लग ऊ कथै, तै जउन अपन डउकी के बात सुने हबस, अउ जउन रूख कर फडुहा के बारे हे मै तोके आदेस दय रहों कि तै ओही झइ खाबे, ओही तै खाय हबस, इहैनिता जमीन तोर कारन सरापित हबै, तै ओखर उपजाऊ जीवन भर दुख के संग खाय करहे। 18अउ ऊ तोर निता कांटा अउ किटिल्ली उगाही, अउ तै खेत के उपज खइहे। 19अउ अपन माथा के पसीना के रोटी खाय करहे, अउ आखरी हे माटी हे मिल जइहे काखे तै उहै मसे निकारे गय हबस, तै माटी तो हबस अउ माटी हे फेरै मिल जइहे। 20आदम अपन डउकी के नाम हव्वा धरिस, काखे जेतका मनसे जिन्दा हबै उन सगलू के आदिमाता उहै हबै। 21अउ भगवान आदम अउ ओखर डउकी के निता खलरी के बन्डी बनाय के उनके पेहराय दइस।

आदम अउ हब्बा के बगिया लग निकाडथै

22फेर भगवान कथै, “मनसे हमर जसना हुइ गय हबै, मनसे निक्खा अउ बुरा जानथै अउ अब मनसे जीवन के रूख लग फडुहा लइ सकथै, अगर मनसे ऊ फडुहा के खाय लेही ता ऊ हरमेसा जिन्दा रइही।” 23इहैनिता भगवान उनके अदन के बगिया मसे निकार दइस, जउन माटी लग आदम बने रथै, ऊ जमीन हे आदम के बोहत मेहनत करै के पडिस। 24भगवान आदम के बगिया लग बाहिर कर दइस, तब भगवान करूब नाम स्वरगदूत के अदन बगिया कर दूरा हे देख-रेख के निता रखिस, उहां अक्ठी आग के तलबारो रख दइस, हइ तलबार जीवन के रूख के रास्ता के देख-रेख करत चारो पार चमकत रथै।