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डिमाकवाला इन्सान को आचरण

1अपनी रोटी पानी का उपर डाली दे, क्युकी बोत दिन का बाद तू ओखे फिर पाये. 2सात वरन आठ जन खे भी भाग दे, क्युकी तू नी जानस कि धरती पर का विपत्ती अय गिरी. 3अगर बद्दल पानी से भऱ्यो हइ, तब ओखे धरती पर लुण्डकय देस हइ; चाहे झाड दक्षिण का तरप गिरे या उत्तर का तरप, तेभी जो जगा पर झाड गिरे, वही गिऱ्यो ऱ्हेस. 4जो हवा खे ताकतो ऱ्हीहे उ बिज बोनो नी पायो, अरु जो बद्दलहोन खे देखतो ऱ्हीहे उ पिक काटी नी सखे. 5जसो तू हवा का चलना की रस्ता नी जानस अरु कोय रीति से पेटसेबइ का पेट मे बच्चो को आग कसो बडस हइ, असो ही तू परमेश्वर को काम नी जानस जो सब कुछ करस हइ.

6फजर खे अपनो बिज बो, अरु संजा खे भी अपना हात नी रोकनु; क्युकी तू नी जानस कि कोन सफल हुये, यो या उ, या दोय का दोय अच्छा निकले.

7सुरज को उजालो अच्छो लगस हइ, अरु घाम खे देखना से आखहोन खे सुख होस हइ.

8अगर इन्सान भोत साल जिन्दा ऱ्ही, ते वे सब मे खुशी ऱ्हे; पन यो याद रख कि अन्धारा को दिन भी भोत हुये. जो कुछ होस हइ उ बेकार हइ.

जुवानहोन खे सलाह

9हे जुवान, अपनी जवानी मे खुशी कर, अरु अपनी जवानी का दिनहोन मे मगन ऱ्हे; अपनी मनमानी कर अरु अपनी आखहोन कि नजर का अनुसार चले. पन यो जानी रख कि या सब बातहोन का बारे मे परमेश्वर तरो न्याय करे.

10अपना मन से चिन्ता अरु अपना शरीर से दु:ख करे, क्युकी बचपनो अरु जवानी दोय बेकार हइ.